हाजी अली दरगाह ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट से किनारा मस्जिद को दिए गए हालिया आदेश में संशोधन की गुहार लगाई है. ट्रस्ट ने  सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा है कि महाराष्ट्र सरकार के सामने अतिक्रमण हटाने के मामले में किनारा मस्जिद शामिल नहीं थी क्योंकि वह सरकारी जमीन पर नहीं है.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली प्रदेश सरकार की याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने आदेश में कहा, ‘बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी तरह के अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था. दरगाह ट्रस्ट ने उस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन न तो ट्रस्ट ने और न ही किसी अन्य व्यक्ति की ओर से यह गया था कि किनारा मस्जिद को न हटाया जाए. हमें ऐसा लगता है कि सिर्फ आप ही हैं जिन्हें हाई कोर्ट का वह आदेश मानने में दिक्कत हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है.’

ऐसे में अब ट्रस्ट ने कहा कि किनारा मस्जिद को नियमित करने का मुद्दा राज्य सरकार की कमेटी के पास विचाराधीन है इसलिए मस्जिद को तोड़फोड़ के दायरे से बाहर रखा जाए और कमेटी को मामले को चार हफ्ते के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया जाए.

महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में पहले ही दलील दे चुकी है कि इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था के बिगड़ने की आशंका है. क्योंकि इसी इलाके में किनारा मस्जिद भी है. हालांकि कोर्ट दलील पहले ही ख़ारिज कर चुकी है.

कोर्ट ने कहा था कि 30 जून तक बीएमसी प्लान सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करे. कोर्ट ने दरगाह ट्रस्ट के अतिक्रमण हटाने के कदम की सराहना की. कोर्ट ने ट्रस्ट से कहा है कि चार हफ्ते में बाकी अतिक्रमण भी हटाए. दरगाह ट्रस्ट ने एक सौंदर्यीकरण योजना कोर्ट में सौंपी है.


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