जयपुर  देशभर की खाप पंचायतें ज्यादातर अपने अजीबोगरीब फरमानों के लिए खबरों में रहती हैं। कभी प्रेम विवाह तो कभी लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने जैसे फैसलों के बीच राजस्थान के टोंक जिले की एक खाप पंचायत ने आतंकवाद के खिलाफ फरमान जारी किया है। यहां पंचायत ने इस्लामिक स्टेट (IS) के समर्थन में नारेबाजी पर सख्त कदम उठाते हुए इसके खिलाफ आदेश जारी किया है।

खाप ने फैसले में कहा कि भारतीय होने की पहचान, उनकी किसी भी ... मालपुरा की यह पंचायत मुस्लिम बहुल इलाके का प्रतिनिधित्व करती है। टोंक के जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर बसे इस गांव में युवाओं द्वारा IS के समर्थन में नारेबाजी की कुछ घटनाएं सामने आई थीं। अब पंचायत ने सभी युवाओं के इस तरह के किसी कार्यक्रम में शरीक होने या फिर ऐसी नारेबाजी करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

यहां तक कि पंचायत ने प्रशासनिक मामलों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए युवाओं द्वारा सरकारी अधिकारियों को कोई ज्ञापन सौंपने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। फरमान में पंचायत की ओर से चेतावनी देते हुए कहा गया है कि अगर समुदाय के किसी भी सदस्य ने इसका उल्लंघन किया तो ना केवल उसका बहिष्कार कर दिया जाएगा, बल्कि उसे सख्त सजा भी दी जाएगी। हालांकि 50 साल से अधिक उम्र वालों को पंचायत की पूर्व अनुमति लेकर ज्ञापन देने की इजाजत दी गई है।

समुदाय के कुछ युवाओं द्वारा दिसंबर 2015 में IS का समर्थन करते हुए कथित तौर पर नारेबाजी की गई थी। बेंगलुरु में कथित तौर पर की गई एक आपत्तिजनक धार्मिक टिप्पणी के बाद युवाओं ने ऐसे नारे लगाए थे। ये युवा इस घटना की निंदा करते हुए स्थानीय प्रशासन को एक ज्ञापन सौंप रहे थे। पंचायत ने तत्काल इन युवाओं के खिलाफ कड़ाई दिखाई और उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। टोंक की एसपी प्रीति जैन ने बताया कि इस घटना के बाद देशद्रोह के आरोप में 11 युवाओं को गिरफ्तार कर लिया गया था।

पंचायत द्वारा इन युवाओं के खिलाफ पारित निंदा प्रस्ताव में कहा गया, ‘इस मामले से जुड़े तथ्य जब पंचायत की जानकारी में आए, तो मुस्लिम समाज को तकलीफ हुई। सभी पंचायत सदस्य इस घटना की निंदा करते हैं। हम भारतीय अपने देश को किसी भी अन्य चीज से ऊपर रखते हैं और शांति और भाईचारा बनाए रखकर देश का सम्मान करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।’ इस प्रस्ताव की एक प्रति हमारे पास है।

पंचायत सदस्यों ने आगे कहा कि उनके समुदाय का पाकिस्तान या किसी भी कट्टरपंथी संगठन के साथ कोई संबंध नहीं है। फैसले में कहा गया, ‘बच्चों के साथ-साथ वयस्कों को भी चेतावनी दी जाती है कि पंचायत की अनुमति के बिना नारेबाजी करने पर सख्त सजा दी जाएगी। ऐसे लोगों का समाज से बहिष्कार कर दिया जाएगा। हमने यह फैसला भी किया है कि 50 से अधिक उम्र के लोग किसी न्यायसंगत व वाजिब दिक्कत या शिकायत होने पर सरकारी अधिकारियों को ज्ञापन दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए भी पंचायत से पूर्व अनुमति लेनी होगी।’

पंचायत के एक सदस्य ने बताया कि ऐसी घटनाओं से पूरा समुदाय ही बदनाम होता है। ऐसे में इस तरह के सख्त उपायों जरूरी हो गए हैं। पंचायत सदस्य ने कहा, ‘मुझे लगता है कि जो लोग इस्लामिक स्टेट के पक्ष में नारेबाजी कर रहे थे, उन्हें दरअसल यह पता ही नहीं है कि IS क्या है।’ (नवभारत टाइम्स)


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