कश्मीर की महकती वादियों से निकलने वाली बारूद की गंध में प्यार, मुहब्बत और भाईचारे की एक अलग महक आती हैं जो दिल को एक अलग ही सुकून देती हैं.

दरअस, दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के मुस्लिम बहुल त्रिचल गांव में रहने वाले कश्मीरी पंडित 50 वर्षीय तेज किशन डेढ़ साल से बीमार थे. शुक्रवार को उनकी आकस्मिक मौत हो गई. ऐसे में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में आगे आकर हिंदू रीति रीवाजों से अंतिम संस्कार करने में पूरी मदद की.

मृत तेज किशन के भाई जानकी नाथ पंडिता ने कहा, ‘यह असली कश्मीर है. यह हमारी संस्कृति है और हम भाईचारे के साथ रहते हैं. हम बंटवारे की राजनीति में विश्वास नहीं रखते.’ वहीँ पड़ोसी मोहम्मद युसूफ ने कहा, ‘अंतिम संस्कार में शामिल अधिकतर लोग मुस्लिम थे. हमने उनकी अंतिम रस्मों को पूरा किया. हम हिंदू और मुसलमानों को बांटने के प्रयास में होने वाली घटनाओं की निंदा करते हैं.

तेज किशन हमेशा से यहाँ ही रहे. ह कहते थे कि वह मुसलमान दोस्तों के साथ पले-बढ़े और उन्हीं के बीच मरना पसंद करेंगे. किशन की मौत की खबर मिलते हुए इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. किशन अंतिम संस्कार के लिए मस्जिद से ऐलान किया गया.


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