पेलेट गन

हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर घाटी में शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की गई पेलेट गन से घायल हुए लोगों में 50 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिनकी आँखें पेलेट गन की गोलियों से घायल हुई हैं.इनमें से कई लोगों की आंख की रोशनी भी जा चुकी है.

कश्मीरीयों को तितर-बितर करने के लिए CRPF ने कुल 2,102 गोलियां (पेलेट गन से) चलाई हैं. इनसे कुल 317 लोग घायल हुए और उनमें से 50 प्रतिशत लोगों की आंखों में जाकर इस गोली के छर्रे लगे हैं.

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पेलेट गन क्या है?

ये पंप करने वाली बंदूक है जिसमें कई तरह के कारतूस इस्तेमाल होते हैं. कारतूस 5 से 12 के रेंज में होते हैं, पांच को सबसे तेज़ और ख़तरनाक माना जाता है. इसका असर काफ़ी दूर तक होता है. पेलेट गन से तेज़ गति से छोटे लोहे के बॉल फायर किए जाते हैं और एक कारतूस में 500 तक ऐसे लोहे के बॉल हो सकते हैं.

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फायर करने के बाद कारतूस हवा में फूटते हैं और छर्रे एक जगह से चारों दिशाओं में जाते हैं. निशाने की तरफ फायर करने के बाद छर्रे सभी दिशाओं में बिखरते हैं जिससे पास से गुज़रते या दूर खड़े किसी को भी चोटें आ सकती हैं जो प्रदर्शन या भीड़ का हिस्सा भी नहीं हैं.

कश्मीर में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के पीआरओ राजेश्वर यादव कहते हैं कि सीआरपीएफ़ के जवान प्रदर्शनकारियों से निपटने के दौरान ‘अधिकतम संयम’ बरतते हैं. विरोध प्रदर्शन को विफल करने के लिए हम 9 नंबर का कारतूस इस्तेमाल करते हैं. इसका कम से कम प्रभाव होता है और ये घातक नहीं है.

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लेकिन यादव की बात से सहमति नहीं रखने वाले एक उच्च पुलिस अधिकारी अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर कहते हैं कि सुरक्षाबलों को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए 12 नंबर के कारतूस का इस्तेमाल करना चाहिए. बहुत की कठिन परिस्थितियों में नंबर 9 कारतूस का इस्तेमाल होना चाहिए.


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