प्रसिद्ध एतिहासिक शासक टीपू सुलतान की जयंती के आयोंजन पर रोक लगाने सबंधी याचिका को कर्नाटक हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. साथ इस आयोजन पर भी रोक लगाने से इंकार कर दिया है.

दरअसल राज्य में 10 नवम्बर को टीपू सुलतान की जयंती बड़े धूमधाम से मनाई जाएगी. याचिकाकर्ता केपी मंजूनाथ ने कर्नाटक में अपने गृह नगर कोडगु में टीपू जयंती का आयोजन करने से रोकने की अपील की थी.

सांप्रदायिक तनाव का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने कहा था कि  वर्ष 2015 में पहली बार राज्य सरकार की ओर से आयोजित टीपू जयंती में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी. हालांकि इस दौरान वे यह साबित करने में विफल रहे कि टीपू जयंती पर सांप्रदायिक हिंसा हुई थी. साथ ही टीपू जयंती समारोह का खर्च राज्य सरकार उठती है.

ध्यान रहे पिछले दिनों केन्द्रीय राज्यमंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कर्नाटक सरकार के टीपू जयंती मनाने के फ़ैसले को लेकर विवादित बयान देते हुए टीपू सुल्तान को ‘बलात्कारी’ और ‘क्रूर हत्यारा’ करार दिया था.

हालांकि देश के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाटक विधानसभा की 60वीं वर्षगांठ पर टीपू सुल्तान को अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ते हुए शहीद होना वाले योद्धा बताया था. उन्होंने कहा, टीपू सुल्तान ने मैसूर रॉकेट के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया और युद्ध के दौरान इनका बेहतरीन इस्तेमाल किया. इसी रॉकेट को बाद में यूरोप के लोगों ने भी इसका इस्तेमाल किया.


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