afzal guru

लखनऊ. अफजल गुरु के समर्थन में नारे लगाने वाले को देशद्रोही कहा गया तो गोडसे और सावरकर का समर्थन करने वाले देशद्रोही क्यों नहीं। यह कहना है SFI (स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) के जिला अध्यक्ष अनुपम यादव का जिन्होंने सोमवार को विधान सभा के सामने गृह मंत्री का पुतला फूंका और जेएनयू स्टूडेंट कन्हैया कुमार की रिहाई की मांग की।

अफजल का समर्थन नहीं
अनुपम का कहना है कि वे अफजल गुरु या किसी राष्ट्र विरोधी गतिविधि का समर्थन नहीं करते लेकिन जो कन्हैया कुमार के साथ JNU में हुआ वो सरासर गलत है। हम उनकी गिरफ्तारी का विरोध करते हैं। इसके अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बिना किसी सबूत के जेएनयू स्टूडेंट्स को हाफिज सईद से कनेक्ट कर दिया जो बिलकुल भी सही नहीं है।

SFI

यूनिवर्सिटी का हो रहा है भगवाकरण
अनुपम यह भी कहने से नहीं चूके कि लखनऊ यूनिवर्सिटी का भगवाकरण हो रहा है। यूनिवर्सिटी की चीफ प्रॉक्टर निशी पांडे एबीवीपी के छात्रों का समर्थन करती हैं लेकिन वामपंथ के विचारों को मानने वाली किसी भी स्टूडेंट यूनियन के समर्थन में वे नहीं रहतीं। वहीं इस मामले में प्रो. निशी पांडे का कहना है कि वे जेएनयू की घटना का लखनऊ यूनिवर्सिटी में कोई असर नहीं होने देंगी। यूनिवर्सिटी में अनुशासन बरकरार रखने की पूरी कोशिश की जाती है और यह आरोप सरासर गलत है कि वे वामपंथी विचारों के मानने वाली स्टूडेंट्स यूनियन के खिलाफ हैं। वहीं प्रो. निशी पांडे के तर्क के विपरीत यूनिवर्सिटी के ही हिंदी डिपार्टमेंट के प्रो. केसी सनेही का कहना है कि यूनिवर्सिटी के भगवाकरण की लगातार कोशिशें हो रही हैं लेकिन कुलपति साहब ने यूनिवर्सिटी में अनुशासन बनाए रखा है।

स्टूडेंट्स के मुद्दे नहीं उठाता SFI
एबीवीपी के छात्र नेता अजीत प्रताप सिंह का कहना है कि वामपंथ विचारधारा वाली स्टूडेंट यूनियन कभी भी छात्रों से जुड़े मुद्दे नहीं उठाते। यह लोग केवल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। ऐसे में इनका यह आरोप भी सरासर गलत है कि लखनऊ यूनिवर्सिटी का भगवाकरण करने की कोशिश की जा रही है। (up.patrika)


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