अनुपम खेर ने कहा, ‘इतनी फ्रीडम वाला ऐसा कोई देश नहीं है, जैसा मेरा देश है। आप इस देश में रह रहे हैं तो जो नियम आप घर पर लागू करते हैं, वही देश के लिए भी करें। क्या आप अपने पिता को गाली या धमकी देते हैं?

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के आखिरी दिन ‘फ्रीडम ऑफ स्‍पीच’ विषय पर बहस के दौरान ऐसा अखाड़ा मचा कि लोग हैरान रह गए। बहस के दौरान गालियों का प्रयोग करने में न तो नेता पीछे रहे और न ही अभिनेता। सोमवार को लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन मंच से एक्टर अनुपम खेर और आम आदमी पार्टी नेता कपिल मिश्रा ने अपने उदाहरणों में गाली का इस्तेमाल किया। वहीं, पत्रकार मधु त्रेहान ने प्रतिबंधित जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

प्रतिक्रिया के तहत जेडीयू नेता पवन वर्मा ने दोनों पर मामले दर्ज करने की बात कही। खचाखच भरे फ्रंट लॉन में जब कपिल मिश्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर छींटाकशी की तो लोगों ने हाथ उठाकर मोदी-मोदी के नारे लगाना शुरू कर दिए। इन्हें मंच से अनुपम खेर ने और उकसाया। हालांकि, मधु त्रेहान ने इस पर आपत्ति जताई तो खेर ने कहा कि लोगों ने नारे लगाए थे, मैंने तो सिर्फ उन्हें सराहा। अनुपम खेर ने कहा, ‘इतनी फ्रीडम वाला ऐसा कोई देश नहीं है, जैसा मेरा देश है। आप इस देश में रह रहे हैं तो जो नियम आप घर पर लागू करते हैं, वही देश के लिए भी करें।

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क्या आप अपने पिता को गाली या धमकी देते हैं, लेकिन आप प्रधानमंत्री को गाली दे देते हैं। आप घर वाले नियम ही देश पर भी लागू करें। मधु त्रेहान ने बोलने की आजादी पर हो रहे प्रहार को बताने के लिए प्रतिबंधित शब्दों को बीप कर के बोला तो अनुपम खेर आए और उन्हीं शब्दों को खुलकर बोले। उन्‍होंने कहा, मधु आपको इन्हें बीप करने की जरूरत नहीं है। देश में बोलने की आजादी है और कोई आपको रोकने नहीं आ रहा है। बाद में कपिल मिश्रा आए तो उन्होंने भी गाली का उल्लेख करते हुए कहा कि भले ही हम यह हर किसी को नहीं बोल सकते, लेकिन पिताजी को मैंने प्रधानमंत्री की तरह वोट दे कर थोड़े ही चुना है।

यदि वह थप्पड़ मारने वाले पड़ोसी के घर चाय पीकर आएंगे तो पिता की भी आलोचना करूंगा। सरकार कौन होती हैं, हमें यह बताने वाली मैं टि्वटर या फेसबुक पर क्या लिखूं? उन्होंने सुहेलसेठ पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की और बहस को राजनीतिक स्तर पर ले गए। साभार: जनसत्ता


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