झारखंड के शोभापुर में बच्चा चोरी की झूठी अफ़वाह फैलाकर मुस्लिम पशु व्यापारियों की हत्या के मामलें में बड़ा खुलासा हुआ हैं.

इस हत्याकांड को पुलिस की मोजुदगी में अंजाम दिया गया हैं. मिली जानकारी के अनुसार, जब नईम को बेदर्दी से पिटा जा रहा था तो पुलिस भी मौके पर मौजूद थी. इस दौरान पुलिस ने नईम को बचाने की जहमत भी नही उठाई. बजाय इसके तमाशबीन बनी रही.

सोशल मीडिया पर वायरल हुए घटना के वीडियो में  देखा जा सकता है कि भीड़ के साथ कुछ पुलिस वाले भी मौके पर मौजूद दिख रहे हैं. इन्डियन एक्प्रेस की ख़बर के मुताबिक, इस घटना के चश्मदीदों में एक पुलिस डीएसपी, एक सर्किल इंस्पेक्टर, दो पुलिस एएसआई और कम से कम 30 पुलिसवाले शामिल हैं.  इसके अलावा तमाशा देखने वालों में राजनगर पुलिस थाने के पुलिसवाले थे भी थे जिसके तहत घटनास्थल आता है.

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हलीम के बड़े भाई शेख सलीम कहते हैं, “हम अपनी पहचान छिपाने के लिए हेलमेट पहनकर कुछ लोगों के साथ मोटरसाइकिल से पहुंचे लेकिन सैकड़ों लोगों को देखकर हम भाग गए. वो हमें सुबह छह बजे तक फोन करते रहे। फिर उनका फोन नहीं आया.”

18 मई की सुबह छह बजे राजनगर पुलिस थाने पर कुछ गांववालों ने फोन किया. 6.30 बजे तक थाना प्रभारी कुशवाहा, दो एएसआई और पांच हवलदारों के साथ शोभापुर पहुंच गए. कुशवाहा कहते हैं, “हम वहां पहुंचे तो लोग एक नौजवान को बच्चा चोर बताकर पीट रहे थे. हमने भीड़ से बात करके उन्होंने मनाने की कोशिश की लेकिन उनके सिर पर खून सवार था. वहां बहुत ज्यादा लोग थे और भीड़ बढ़ती ही जा रही थी. मैंने अपनी जिंदगी में ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था.”

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चश्मदीदों और पीड़ितों के परिवारवालों के अनुसार सज्जू, सिराज और हलीम जान बचाकर भागने में सफल रहे। लेकिन भीड़ नईम को तीन घंटे तक लाठी और रॉड से पीटती रही. पुलिस देखती रही. दोपहर करीब 1 बजे पुलिस ने सज्जू और सिराज के शव पड़नामसाई से बरामद किया. भीड़ में से कुछ लोगों ने उनका पीछा किया था और उन्हें मार कर उनके शरीर में आग लगा दी थी. पीड़ितों के परिजनों का कहना है कि उन्होंने पुलिस को सूचित किया था कि लेकिन पुलिस ने उसका  संज्ञान नहीं लिया.

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