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झारखंड के हजारीबाग के डरही काला गांव में चल रहा कफन सत्याग्रह 16वें दिन खूनी संघर्ष में बदल गया.  प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में चार ग्रामीणों के मारे जाने और 10 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर हैं.

एनटीपीसी के अंतर्गत काम कर रही त्रिवेणी सैनिक कंपनी के खनन कार्य रोकने के साथ भूमि अधिग्रहण का निबटारा करने और विस्थापित रैयतों को 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधान के तहत मुआवजे के भुगतान को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे.

शनिवार सुबह करीब सात बजे हुई पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प के बाद पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी जिसमे चार ग्रामीणों की मौत हो गई. साथ ही एएसपी अभियान कुलदीप कुमार व अंचलाधिकारी (सीओ) बड़कागांव शैलेश कुमार सहित सात पुलिसकर्मी भी घायल हो गए.

गंभीर रूप से घायल एएसपी, सीओ व कांस्टेबल अजय कुमार प्रमाणिक को हजारीबाग से हेलीकॉप्टर से रांची के मेडिका अस्पताल रेफर किया गया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब भीड़ हिंसक हो गई, तब पुलिस ने उसे नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया और गोलियां चलाईं, जिससे चार लोगों की मौत हो गई और 10 से अधिक लेाग घायल हो गए.

इसके अलावा पुलिस और पब्लिक के बीच हिसक झड़प के दौरान ट्‌यूशन पढ़ कर लौट रहे 16 वर्षीय सिदुवारी निवासी रंजन कुमार को भी गोली लगने से मौत हो गई. घर लौटने के दौरान उसके पेट में गोली लगी जिसके कारण मौके पर ही छात्र की मौत हो गई.

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दिया. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बड़कागांव में हुई हिंसा पर उच्चस्तरीय जांच के लिए गृह सचिव एनएन पाण्डेय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय दल के गठन की घोषणा कर दी. उन्होंने जांच दल को घटनास्थल का दौरा कर मामले की जांच के बाद तत्काल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं.


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