जाट आरक्षण लागू करने और झूठे मुकद्दमे रद्द करने की मांग को लेकर जाट आरक्षण संघर्ष समितियां और पंचायतें 14 मार्च को प्रदेशभर में ज्ञापन देने जा रही हैं. अगर इसके बाद भी मांगे पूरी नहीं हुई तो 17 मार्च को दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी गई है. इसी के मद्देनजर पुलिस प्रशासन सामाजिक सौहार्द बनाने की मुहिम में जुट गया है. पुलिस प्रशासन पंच, सरपंच और 36 बिरादरी के लोगों के साथ बैठक कर सामाजिक सौहार्द और भाईचारा बनाने की कोशिश कर रहा है.

जाटों की चेतावनी, मुकदमें रद्द करो वरना 17 मार्च को करेंगे आंदोलन

बहादुरगढ़ में रविवार को एसपी जश्नदीप सिंह ने सदर थाने में खंड के पंच, सरपंच और 36 बिरादरी के लोगों के साथ बैठक की. इसमें एसपी ने बहादुरगढ़ में सामाजिक भाईचारा कायम रखने के लिए लोगों को बधाई दी. कहा कि भविष्य में भी ऐसा ही सामाजिक सौहार्द बनाये रखें. अगर कोई मांग करनी है तो शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के सामने रखे.

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने सरकार को आगाह किया कि जाट सभी आयोगों को टैस्ट दे चुके हैं, अब सिर्फ ‘लठ टैस्ट’ ही बचा है. सरकार चाहे तो वे उस टैस्ट का भी सामना करने को तैयार हैं.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 17 मार्च तक जाटों को आरक्षण नहीं दिया गया तो 18 से पूरे प्रदेश में शांतिपूर्ण आंदोलन की शुरुआत कर दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सोमवार को पूरा समाज एकजुट होकर रोहतक में शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन को ज्ञापन सौंपेगा. जाट अपने हकों की लडाई के लिए किसी भी दबाव में नहीं आएंगे. वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे, अगर उनसे जोर जबरदस्ती की गई तो उसका जवाब वो ईंट की बजाय पत्थर से देंगे.

उन्होंने कहा कि कोई कानून व्यवस्था बिगड़ी तो उसकी जिम्मेदार भी सरकार ही होगी. यशपाल मलिक रविवार को महम के चबूतरे पर आयोजित जाट एकता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. खास बात यह रही कि बहुचर्चित महम खाप सहित प्रदेश की अन्य खाप पंचायतें इस आयोजन से दूर दिखी.

मलिक ने सरकार पर जाटों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जाटों ने सबसे पहले केलकर आयोग के सामने टैस्ट दिया, उसके बाद से मंडल आयोग, केसी गुप्ता जैसे कई आयोगों के सामने अपनी बात रख चुके हैं, मगर सरकार उन्हें हल्के में ले रही है. उन्होंने कहा कि अब जाटों का इम्तिहान मत लो, अब जो बचा है वो आर-पार की लडाई का रास्ता बचा है. (pradesh18)


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