महापंचायत ने सीएम मनोहर लाल खट्टर के प्रति समर्थन व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि यह आरक्षण के लिए आंदोलन नहीं था बल्कि गैर जाट मुख्‍यमंत्री के खिलाफ साजिश के तहत हिंसा की गई।

हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। खबर है कि 100 गांव के 35 समुदायों ने जाटों के सामुदायिक बहिष्‍कार का फैसला किया है। यह निर्णय हाल ही में हुई 100 गांवों की महापंचायत में लिया गया। जिन गांवों के लोगों ने जाटो के बहिष्‍कार का फैसला किया है, उनमें मानेसर, सिकंदरपुर सिही, नखरोला, रामपुरा, खोह, बिलासपुर, नोरांगपुर आदि शामिल हैं। महापंचायत का आयोजन शनिवार को नखरोला गांव में मोहम्‍मदपुर के पूर्व सरपंच नाथू सिंह के नेतृत्‍व में आयोजित की गई थी।

महापंचायत में जाट आंदोलन के दौरान 30 लोगों की हत्‍या का मुद्दा भी उठा, जिस पर चर्चा के बाद सरकार से मांग की गई है कि प्रदर्शनकारियों पर हत्‍या का मुकदमा भी दर्ज किया जाए। मानेसर के पूर्व सरपंच ओम प्रकाश यादव ने कहा, ‘खुद को ऊंचा दिखाने के लिए किसी को दूसरे आदमी की जान लेने का हक नहीं है। जाटों ने किया उसे किसी भी सूरत में स्‍वीकार नहीं किया जा सकता है, इसलिए हमने जाटो के सामाजिक बहिष्‍कार का फैसला किया है। अगर कोई और समुदाय ऐसा काम करेगा तो उसका भी बहिष्‍कार किया जाएगा।’

महापंचायत ने सीएम मनोहर लाल खट्टर के प्रति समर्थन व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि यह आरक्षण के लिए आंदोलन नहीं था बल्कि गैर जाट मुख्‍यमंत्री के खिलाफ साजिश के तहत हिंसा की गई। महापंचायत में शामिल सदस्‍यों ने कहा कि जाटों ने हरियाणा पर 40 साल राज किया और फिर भी वे खुद को कमजोर बता रहे हैं। हरियाणा में पुलिस में जाट भरे पड़े हैं इसलिए वे लोगों की लुटती दुकानों को चुपचाप देखते रहे। (Jansatta)


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