श्रीनगर जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट ने शनिवार को राज्य पुलिस से पूछा कि उसने किस कानून के तहत विवादित विडियो वाली नाबालिग लड़की को हिरासत में लिया? ऐसे आरोप लगे हैं कि इस लड़की का एक सैनिक ने हंदवाड़ा में यौन उत्पीड़न किया था। इस घटना की वजह से शुरू हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में 5 लोग मारे गए हैं। लड़की की मां ताज बेगम ने शनिवार को हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी बेटी और 2 दूसरे परिजनों की पुलिस की ‘अवैध हिरासत’ से रिहाई की मांग की है।

ताज बेगमताज के वकील परवेज इमरोज ने यह जानकारी दी। इमरोज ने कहा कि जस्टिस एमएच अतर ने राज्य को नोटिस जारी करने के अलावा हंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक और संबंधित पुलिस थाने को निर्देश दिया कि वे अदालत को बताएं कि उन्होंने किस कानून के तहत नाबालिग लड़की, उसके पिता और उसकी मौसी को 12 अप्रैल की घटना के बाद से हिरासत में रखा हुआ है? उन्होंने कहा कि अदालत ने पुलिस को लड़की को बयान दर्ज कराने के लिए मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट के सामने पेश करने का भी निर्देश दिया।

इमरोज ने कहा, ‘अदालत ने यह भी कहा कि लड़की के पिता और उसकी मौसी को प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने पेश होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।’ उन्होंने कहा कि मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल की तारीख तय की गई है। ताज बेगम ने इमरोज के माध्यम से दायर की गई अपनी याचिका में दलील दी कि उनकी बेटी, पति और बहन को संविधान की धारा 21 के तहत सुनिश्चित किए गए सांवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए अवैध हिरासत में रखा गया है।

वकील ने अदालत से यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को अपनी नाबालिग बेटी, पति और बहन की जान खतरे में होने की आशंका है। मंगलवार को हंदवाड़ा में एक जवान द्वारा लड़की से कथित छेड़छाड़ के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई। घटना के अगले दिन विरोध प्रदर्शन के दौरान कुपवाड़ा के नाथनुसा इलाके में इस तरह के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक और व्यक्ति की मौत हो गई।

हालांकि, लड़की ने अपने यौन उत्पीड़न की बात से इनकार किया है। सेना ने इसे लेकर उसके बयान का एक विडियो भी जारी किया है लेकिन लड़की की मां ने दावा किया कि विडियो में बयान देने के लिए उसकी बेटी पर दबाव डाला गया। (NBT)


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