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जयपुर की हिंगोनिया गौशाला में गायों की मौत का सिलसिला नहीं रुक रहा हैं. भूखी-प्यास से तडपती और दलदल में फंसी 85 गायों ने दम तोड़ दिया हैं. डॉक्टरों-इंजीनियरों और अफसरों की भारी भरकम फौज होने के बावजूद भी इन गायों को नहीं बचाया जा सका. गौशाला के अधिकारियों के अनुसार, राजस्थान के गौशाला के इतिहास में एक दिन में इतनी गायें कभी नहीं मरीं.

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रविवार को मरने वाली सात बछड़े भी शामिल हैं. अभी भी करीब 40 गायें और गंभीर अवस्था में है. डॉक्टरों का कहना है कि इतने दिनों तक दल-दल में भूखे-प्यासे रहने से इनकी स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि इन्हें बचाया नही जा सकता था. दो-तीन दिनों में सबको मरना ही था. इन सभी को गौशाला के पीछे ही गाड़ा जा रहा है.

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इतनी बड़ी संख्या में गायों के मरने से महामारी फैलने की भी आशंका है जिसके लिए दवाइयों का छिड़काव करवाया जा रहा है. 11 अगस्त को मुख्यमंत्री खुद हिंगोनिया गौशाला का दौरा स्थिति का जायजा लेने आ रही हैं.

गौरतलब रहें कि सरकार इस गौशाला के लिए हर वर्ष 15 करोड़ रूपए जारी करती है. गौशाला में गायों की देखरेख के लिए 17 पशु चिकित्सक और चालीस नर्सिंग स्टाफ भी है. बावजूद इसके इतनी बड़ी संख्या में मर रही हैं.

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