अंबेडकर द्वारा 1926 में गठित समता सैनिक दल का पूरे सूबे में होगा पुर्नगठन
शाहिद आजमी की छठवीं शहादत दिवस पर रोहित वेमुला को याद करते हुए रिहाई मंच ने ‘इंसाफ के लिए संघर्षरत दोस्तों की मुलाकात’ का आयोजन किया
IMG_20160211_164559
लखनऊ । शाहिद आजमी की छठवीं शहादत दिवस के अवसर पर रिहाई मंच ने रोहित वेमुला को याद करते हुए ‘इंसाफ के लिए संघर्षरत दोस्तों की मुलाकात’ का आयोजन जयशंकर प्रसाद हाॅल लखनऊ में किया। जिसमें मंच ने दलितों और मुसलमानों पर बढ़ रहे राज्य प्रायोजित हमलों के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाने का निर्णय लिया। सूबे के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिनिधियों ने मौजूदा साम्प्रदायिक, जातिय और कारपोरेट परस्त राजनीति के खिलाफ एक जनपक्षधर और समावेशी राजनीतिक विकल्प निमार्ण करने पर भी गम्भीर चिंतन किया। सूबे में विभिन्न जगहों पर दलित और मुस्लिम अधिकार सम्मेलन, युवा सम्मेलन करते हुए वादा खिलाफ व जनविरोधी सपा सरकार के चार साल पूरे होने पर विधानसभा पर विरोध-प्रदर्शन करने का प्रस्ताव पारित किया।
इस अवसर पर रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि शाहिद आजमी और रोहित वेमुला की हत्या लोकतंत्र की हत्या है जिसे लोकतंत्र विरोधी हमारी व्यवस्था ने अंजाम दिया है। इसलिए ऐसी शहादतें लोकतंत्र पसंद अवाम के लिए संकल्प का समय होती हंै। रिहाई मंच के इस आयोजन से हमने यह संकल्प लिया है कि शाहिद और रोहित की शहादतें बेकार नहीं जाने दी जाएंगी। लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा हर कीमत पर की जाएगी।
रिहाई मंच आजमगढ़ प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि जो खुफिया एजेंसियां और सरकारें हमारे जिले आजमगढ़ के मुस्लिम युवकों पर आरोप लगा रही हैं कि वो आईएस के नाम पर लड़ते हुए सीरीया और ईराक में मारे जा रहे हैं उनके मुंह पर संवैधानिक मूल्यों पर सघर्षरत शाहिद आजमी की शहादत तमाचा है। जिसकी हत्या खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की साजिश का नतीजा था। उन्होंने कहा कि आज रोहित वेमुला जैसे नौजवान जो की याकूब मेमन की फांसी और दलितों के उत्पीड़न पर सवाल उठाते थे, उन्हें जिस तरह से आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा वह हमारी पूरी व्यस्था के इंसाफ विरोधी चरित्र को उजागर करता है।
IMG_20160211_141008
इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि इंसाफ के लिए चलाया जा रहा रिहाई मंच का आंदोलन इंसाफ के सवाल को राजनीति का केन्द्र बिन्दु बनाने की क्षमता रखता है। इसलिए इंसाफ पसन्द अवाम के बीच इस आंदोलन का आकर्षण तेजी से बढ़ा है और लोग इंसाफ के सवाल पर राजनीतिक दलों से सवाल पूछने लगे हैं। आज जब आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों पर और जाति के नाम पर दलितों के ऊपर सत्ता संरक्षित हमले बढ़े हैं तब यह जरूरी हो जाता है कि लोग अपनी दलगत सीमाओं से उठकर इंसाफ के इस अभियान को निर्णायक दिशा दें।
सामाजिक न्याय मंच के अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि मनुवादी शक्तियों के खिलाफ बाबा साहब अंबेडकर द्वारा 1926 में गठित किए गए समता सैनिक दल को पूरे सूबे में पुर्नगठित करने का निर्णय स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि मंच द्वारा पूरे सूबे में मुस्लिम दलित अधिकार सम्मेलन का आगाज राजनीति को नई दिशा देगा, जिसका इंतजार सूबे के लोगों को लंबे समय से है।
कॅार्ड के अतहर हुसैन ने कहा कि सामाजिक न्याय के सवाल को जनता की आर्थिक आजादी से काटकर नहीं देखा जा सकता। काॅरपोरेट हित में समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की सियासत हो रही है। मंच को इस सवाल को लेकर जनता के बीच जाना होगा।
डा0 बेला ने कहा कि दलित छात्रों के साथ लगातार भेदभाव किया जाता है। रोहित की ही तरह मेरी भी स्काॅलरशिप रोकी गई। आरएसएस के लोग जब बोलते हैं तो उन्हें राष्ट्रवादी कहा जाता है और जब दलित-मुस्लिम समाज अपने अधिकारों की बात करता है तो उसको राष्ट्र विरोधी घोषित कर दिया जाता है। ऐसे में हमें समाज में गैरबराबरी वाली जेहनियत के खिलाफ संगठित होना पड़ेगा।
आजमगढ़ से आए तारिक शमीम ने कहा कि पूंजीवादी शक्तियां तीसरी दुनिया के कमजोर देशों को फिर से गुलाम बनाने की साजिश के तहत आतंकवाद की राजनीति कर रही हैं। अलग-अलग देशों में अपने हित को साधने के लिए उनके पास अलग-अलग मोहरें हैं इसी एक मोहरे का नाम आरएसएस है।
गोण्डा से आए रिहाई मंच नेता रफीउद्दीन ने कहा कि आज मुस्लिम युवा घर से निकलने से डरने लगा है कि कब उसे कहीं से उठाकर किसी फर्जी मुकदमें में न फंसा दिया जाए। रिहाई मंच गांव-कस्बे तक पहुंचकर इस दहशत को खत्म कर लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा।
सिद्धार्थनगर से आए डा0 मजहर ने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों ने देश को आतंरिक तौर पर कई टुकड़ों को बांट दिया है। आज जरुरत लोगों को जोड़ने की है। जो इस दौर में रिहाई मंच बखूबी कर रहा है।
फैजाबाद से आए अतहर शम्सी ने कहा कि जिस तरह से चुनाव की आहट होते की मुस्लिमों पर हमले बढ़ जाते हैं वो साफ करता है कि वोटों के ध्रुवीकरण के लिए ऐसा राजनीतिक दल करते हैं। आगामी समय में चुनाव फिर होना है ऐसे हमें यह तय करना होगा कि अब कोई अखलाक न मारा जाए।
उन्नाव से आए जमीर खान ने कहा कि ने कहा कि पिछले दिनों मुलायम सिंह ने बयान दिया था कि अगर प्रधानमंत्री कहेंगे तो मैं मुजफ्फरनगर और दादरी के हत्यारों का नाम बता दूंगा। सवाल उठता है कि मुलायम सिंह इस सूबे की जनता और   देश के संविधान के प्रति जवाबदेह हैं या उस नरेन्द्र मोदी के जो आरएसएस के एजेण्डे को बढ़ाने के लिए 2002 में मुसलमानों का कत्लेआम करा चुके हैं।
बलिया से आए बलवंत यादव ने कहा कि जब तक बांटो और राज करो की सियासत का खात्मा नहीं होता तब तक इस देश की अवाम मरती रहेगी। आज जरूरत इंसाफ के सवाल पर पूरे समाज को लेकर राजनीतिक पहल करने की है।
रिहाई मंच के आंदोलन की राष्ट्रीय फलक पर महसूस की जा रही जरूरत पर रोशनी डालते हुए दिल्ली से आए मो0 नदीम ने कहा कि जिस तरह से सांप्रदायिक ताकतें सक्रिय हैं उसमें इस आंदोलन की सिर्फ यूपी में ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी जरुरत है।
कानपुर से आए अखलाक चिश्ती और मोहम्मद शकील ने कहा कि शाहिद आजमी की शहादत दिवस पर रोहित वेमुला को याद करते हुए जब हम एकत्र हुए हैं तो हमें इस बात का संकल्प लेने की जरुरत है कि हम एक ऐसी एकता बनाएं जो इस तरह के नाइंसाफियों के खिलाफ सिर्फ आवाज ही न उठाए बल्कि उन्हें होने ही न दे।
मो0 इमरान ने कहा कि मुहम्मद शुऐब पर सालों पहले कचहरियों में हमले हुए उसके बाद भी वह इंसाफ के लिए लड़ते रहे और आज बेगुनाह बरी हो रहे हैं। रिहाई मंच का लंबा सघर्ष समाज में इंसाफ के सवाल को नई राजनीतिक दिशा दे रहा है।
मौलाना इरशाद ने कहा कि रिहाई मंच की कोशिशों से बेगुनाह लगातार बरी हो रहे है, लेकिन जिस तरह से फिर से गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरु हो गया है उसमें हमें रिहाई मंच को अधिक से अधिक विस्तार देने की जरूरत है। वहीं केके वत्स ने इस बात पर जोर दिया कि रिहाई मंच विधान सभावार अपनी यूनिटों को गठित करे। क्योंकि जो हमला है उसके खिलाफ अगर लड़ा नहीं गया तो आने वाली नस्ले हमें माफ नहीं करेंगी।
‘इंसाफ के लिए संघर्षरत दोस्तों की मुलाकात’ में यह निर्णय लिया गया कि 1926 में अंबेडकर द्वारा मनुवादी और फांसीवादी तत्वों के खिलाफ गठित समता सैनिक दल को दिनेश चैधरी के नेतृत्व में पूरे सूबे में पुर्नसंगठित किया जाएगा। मंच सपा सरकार की वादा खिलाफी और आईएस के नाम पर बेगुनाहों की गिरफ्तारी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को और विस्तार देगा और जगह-जगह दलित और मुस्लिम अधिकार सम्मेलन आयोजित करेगा।
‘इंसाफ के लिए संघर्षरत दोस्तों की मुलाकात’ का संचालन राजीव यादव ने किया। जिसमें मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय, मुरादाबाद से सलीम बेग, गोण्डा से आए अब्दुल हादी, डा0 एम0 डी0 खान, रफत फातिमा, ताहिरा हसन, रामकृष्ण, केके शुक्ला, आदियोग, बलिया से जय प्रकाश मौर्या, बांदा से धनंजय चैधरी, जैद अहमद फारुकी, फरीद खान, लक्ष्मण प्रसाद, अमित मिश्रा, दिनेश चैधरी, फतेहपुर से संजय विद्यार्थी, उन्नाव से संजीव श्रीवास्तव, प्रतापगढ़ से आए शम्स तबरेज खान, मोहम्मद हाफिज, मोहम्मद कलीम, शरद जायवाल, गुंजन सिंह, गाजीपुर से तुफैल खान और सरताज खान, पीसी कुरील, अख्तर, मो0 मसूद, वसी, सीमा चंन्द्रा, आलोक, जाहिद अहमद, जुहैर तुराबी, फैजान मुसन्ना, मऊ आईमा से आए मोहम्मद उमर, शाहनवाज आलम, अनिल यादव, शबरोज मुहम्मदी, शकील कुरैशी, लक्ष्मण प्रसाद, खालिद सिद्दीकी आदि ने शिरकत की।
‘इंसाफ के लिए संघर्षरत दोस्तों की मुलाकात’ में निम्न प्रस्ताव पारित किए गए-
ऽ आईएस और अलकायदा के नाम पर मुसलमानों पर हमले का जवाब बड़े आंदोलन से देगा रिहाई मंच।
ऽ दलित विरोधी सरकार के खिलाफ और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुर्नस्थापना के लिए बाबा साहब डा0 भीमराव अंबेडकर द्वारा 1926 में स्थापित समता सैनिक दल का पुर्नगठन किया जाएगा।
ऽ उत्तर प्रदेश में आतंकवाद के नाम पर हो रही फर्जी गिरफ्तारियों को तत्काल बंद किए जाने के लिए होगा आंदोलन।
ऽ आतंकवाद के मामलों में बरी हुए लोगों के पुर्नवास के लिए चलेगा प्रदेश व्यापी अभियान।
ऽ बुंदेलखंड को दलित उत्पीडि़त क्षेत्र घोषित करते हुए विशेष सामाजिक पैकेज व दलित थानों के निर्माण के लिए चलेगा आंदोलन।
ऽ मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा पर गठित विष्णु सहाय कमीशन की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने व निमेष कमीशन की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर चलाया जाएगा अभियान।
ऽ सूबे में दलित और मुस्लिम अधिकार व युवा अधिकार सम्मेलन किए जाऐंगे।
ऽ वादा खिलाफ व जनविरोधी सपा सरकार के चार साल पूरे होने पर होगा प्रदेश व्यापी विरोध प्रदर्शन।

लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें