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अयोध्या विवाद के संबध में सुलह-समझौते का हवाला देकर गुपचुप तरीके से की जा रही बैठक का मुस्लिम समुदाय की और से बाबरी मस्जिद के मुख्य पक्षकार इकबाल अंसारी ने बॉयकॉट कर दिया. ये बैठक शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने आयोजित की थी.

मुकदमे के पैरोकार हाशिम अंसारी के बेटे इक़बाल अंसारी ने वसीम रिजवी के प्रयास को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि अब वे ऐसी किसी भी बैठक में भाग नहीं लेंगे. उन्होंने साफ़ किया कि सुलह-समझौते के मुद्दे पर केवल अयोध्या के संत-धर्माचार्यों से ही बात करेंगे.

बैठक के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्‍यक्ष नरेंद्र गिरी ने कहा कि, ‘वसीम भाई की एक बात बहुत अच्‍छी लगी कि अयोध्‍या में सिर्फ राम मंदिर ही चाहिए. अभी हम नृत्‍य गोपाल दास जी से मिले हैं. वीएचपी और आरएसएस कहता है कि अयोध्‍या में राम मंदिर संतों के ही माध्‍यम से बनेगा, तो हम सब लोग माध्‍यम बना दिए हैं.’

वसीम रिजवी ने कहा, ‘यहां पर कोई भी मस्जिद बनाने का प्रस्‍ताव हमारी तरफ से नहीं है. ये हम कोर्ट में कह चुके हैं. यहां सिर्फ भगवान श्रीराम का भव्‍य मंदिर बनेगा, इस काम के लिए शिया वक्‍फ बोर्ड पूरी तरह से राम मंदिर निर्माण वालों के पक्ष में है.’

इस बैठक के बारें में सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी कहते हैं कि ऐसे समझौते की कोई कानूनी हैसियत नहीं है क्‍योंकि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे इस मुकाबले में 27 पक्षकार हैं. उनमें से कुछ लोग इस पर कोई समझौता नहीं कर सकते.


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