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मध्यप्रदेश के बालघाट में आरएसएस प्रचारक पर कारवाई करने के कारण दहशत में जीने को मजबूर हो रहें पुलिस अधिकारीयों का दर्द खुलकर सामने आ गया हैं.

पुलिस परिजनों ने आज आईजी को ससोंपे ज्ञापन में निष्पक्ष जांच की मांग रखते हुए कहा कि बालाघाट जिले में पुलिस को अब तक महज नक्सलवादियों का डर था लेकिन अब उन्हें आरएसएस, बजरंग दल, गौ-रक्षा समिति और बीजेपी के कार्यकर्ताओं से ज्यादा डर लगने लगा है.

ज्ञापन में मांग करते हुए कहा गया कि पुलिस को यह आदेश जारी कर दिया जाए कि भाजपा, बजरंग दल, विहिप व अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई ना करे. इसके लिए उन्होंने वर्ष 2015 में उकवा चौकी में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वाराआरक्षक राजेश परते और उसकी पत्नी को घर में घुसकर मारपीट करने का भी हवाला दिया. जिसमे मामले की शिकायत की  एफआईआर भी फाड़ दी गई थी और अब तक कोई जांच भी नहीं हुई.

ज्ञापन में घटना का विवरण देते हुए कहा गया, 5 सितंबर को मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद एएसपी के साथ बैहर थाने का स्टाफ सुरेश यादव को पूछताछ के लिए थाने ला रहा था. इसका सुरेश के साथियों ने विरोध किया और पुलिस से बदतमीजी की. फिर भी पुलिस अफसरों विरोध की परवाह किए बगैर अपने कर्तव्य का निर्वाहन करते हुए सुरेश को थाने लेकर आए.

आगे कहा गया, सुरेश के साथ थाने आए साथियों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की, जिससे सुरेश को भागने में मदद मिली. सुरेश भागकर असाटी के घर पहुंच गया. उसके बाद से उसके साथियों ने पुलिस के साथ गाली-गलौज और धमकाना शुरू कर दिया. पुलिस उनकी धमकी और गालियां सहन करती रही. . पुलिस ने उसको पीछा कर पकड़ा तो उसने धमकी दी कि तुम लोग नहीं जानते हो कि तुमने किस पर हाथ डाला है. हम लोग प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक को कुर्सी से हटा सकते हैं.

 


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