Sakhu-Kiran

मुंबई के मलाड इलाके में हिंदू मुस्लिम एकता का एक नया चेहरा सामने आया जब मुस्लिम समाज के लोगों ने एक हिन्दू अनाथ वृद्धा का हिंदू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया। महाराष्ट्र के मलाड में जहाँ लोगों के घरों में काम कर अपना पेट पालने वाली एक अकेली हिन्दू औरत सखुबाई की मौत हो जाने पर उसके मुस्लिम पड़ोस ने पूरे हिन्दू रीति-रिवाजों के मुताबिक सखुबाई की अर्थी को कन्धा और चिता को आग दी।

सकु बाई अपने पति के साथ मुस्लिम बहुलता वाले इलाके में 1962 में आई थीं। इस दंपति की कोई संतान नहीं थी। पति की मौत के बाद सकु बाई का कोई सगा संबंधी नहीं रहा। सकु बाई दूसरे घरों में काम करके जीवन निर्वाह करती थीं। कुछ दिनों पहले बीमार पड़ने पर उनके इन्हीं पड़ोसियों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया, और उनकी मौत के बाद शुक्रवार को उनका दाह संस्कार किया।

इससे पहले भी सकु बाई के पड़ोसियों ने ही उनके पति का भी अंतिम संस्कार किया था। जब 2002 के गुजरात दंगों के ठीक बाद साम्प्रदायिकता का माहोल था तब भी सकु बाई के पड़ोसियों ने ही हिंदू रीति रिवाज़ के मुताबिक उनके पति का अंतिम संस्कार करके हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल कायम की थी।


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