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देश के व्यवस्था की हालत कितनी बदतर हो चुकी हैं इसका अंदाजा पिछले दिनों उड़ीसा के दाना मांझी की खबर से पता लग चूका हैं. दाना मांझी के बाद भी ऐसे कई लोगों की ख़बरें सामने आई जिसमे उन्हें अपने प्रियजनों की लाश को पहुँचाने के लिए कोई साधन नहीं मिला.

ऐसा ही एक मामला भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पेश आया. जहाँ 75 साल की बूढ़ी मां अपने  45 साल के बेटे की लाश को घर पहुँचाने के लिए परेशान थी. हमीदिया अस्पताल में उनके राजेन्द्र नाम के बेटे की मौत हो गई थी. बेटे की मौत के बाद वो बुजुर्ग महिला घंटों चक्कर लगाती रही लेकिन घर तक डेड बॉडी पहुंचाने के लिए अस्पताल प्रशासन तैयार नहीं हुआ. परेशान महिला अपने नसीब को कोसते हुए थकहार कर बैठ गई.

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रात डेढ़ बजे हॉकी के नेशनल प्लेयर अमजद ने जब उस वृद्ध महिला को रोते देख कर उनसे सहा नहीं गया. उन्होंने इस संबंध में अस्पताल प्रबन्धन से मदद करने को कहा लेकिन अस्पताल ने एंबुलेंस नहीं दी, उन्होंने स्ट्रेचर मांगा लेकिन वो भी नहीं दिया गया. ऐसे में वे खुद मर्चुरी गए और अपने हाथों में उठाकर कर लेके आये और फिर प्राइवेट एम्बुलेंस बुलाकर उस महिला को बेटे के शव के साथ रवाना किया.

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जब उनसे इस बारें में बात की गई, तो इनका जवाब था कि उस महिला की जगह जो भी अपनी अम्मी को रखकर देखता, वो यही करता.

साभार: पत्रकार प्रवीण दुबे (जीन्यूज)


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