मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहजिले गोरखपुर में 2007 में हुए साम्प्रदायिक दंगे के मामले में योगी के खिलाफ कारवाई करने को लेकर अनुमति देने में देर करने के लिए हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को तलब किया हैं.

दरअसल, इस मामलें में योगी आदित्यनाथ खुद मुख्य आरोपी  है. ऐसे में इस मुकदमे को आगे चलाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी है. अनुमति नहीं मिलने से मुकदमे चलाने में हो रही देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपनी सख्त नाराजगी जताई है.

इस मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को 11 मई को रिकार्ड के साथ तलब कर लिया है. कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी से व्यक्तिगत हलफनामा भी मांगा है. याचिकाकर्ता मानवाधिकार कार्यकर्ता परवेज परवाज और असद हयात की ओर से दाखिल याचिका में दंगे की जांच सीबीआई या फिर किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने की भी मांग की गई है.

मामले की जांच सीबीसीआईडी ने की है लेकिन सीएम योगी समेत सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है. लिहाजा इस केस के तहत दर्ज मुकदमे में ट्रायल शुरू करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी जरूरी है.

वहीं दंगे के मुख्य आरोपी के ही सीएम और गृह मंत्री होने पर मुकदमा चलाने की अनुमति कौन देगा, कोर्ट में इस पर भी बहस चल रही है. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस यूसी श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच ने चीफ सेक्रेटरी को तलब किया है. जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई अब 11 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी.


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