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राज्य के उदयपुर शहर के मादड़ी गांव में भूख की वजह से एक बच्ची और उसके दो भाइयों की मौत हो गई. वहीँ दूसरी तरफ राजधानी जयपुर में गायों पर इंसानों से ज्यादा खर्च किया जा रहा हैं. ग्रामीणों के अनुसार परिवार को दो महीने से राशन नहीं मिला था.

पिछले दो सालों से हिंगोनिया पशु पुनर्वास केंद्र की हर गाय पर सालाना 40,000 रुपये खर्च किये गए हैं. जबकि JMC का शहर के लोगों पर औसतन खर्च सिर्फ 500 रुपये सालाना है. इसके बावजूद भी गायों को भी मौत का सामना करना पड़ रहा हैं.

एक अधिकारी ने बताया, ‘हिंगोनिया में 8,000 गायें हैं. 2007-08 में गौशाला के लिए सालाना बजट 5.19 करोड़ का था, जिसे 2015-16 के लिए बढ़ाकर 10,78 करोड़ कर दिया गया. इसके अलावा पिछले वित्तीय वर्ष में सड़क, चारदीवारी और शेड्स बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये और खर्ज किये गए.

JMC के आंकड़ों के मुताबिक कॉर्पोरेशन 2014 से 2016 के बीच काउ शेल्टर बनाने पर 42.64 करोड़ रुपये खर्च किया है. इसका मतलब ये हुआ कि प्रति गाय 26,650 रुपये सालाना खर्च किया गया. वहीं सालाना 15-20 लाख रुपये सिर्फ बिजली पर खर्च किया जा रहा है.


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