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दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद हैदराबाद यूनिवर्सिटी में लगातार छात्रों का आंदोलन जारी है और इस दौरान यह भी पता चला है कि यूनिवर्सिटी के अंदर भेदभाव के प्रतीक भी मौजूद हैं। लगभग तीन दशक से यूनिवर्सिटी के अंदर ‘ब्राह्मणों का कुआं’ है जो इस समय यूनिवर्सिटी में चल रह आंदोलन को लेकर चर्चा में है। छात्र चाहते हैं कि इस उच्च जाति के प्रतीक को बंद किया जाए।

1980 में मे गणित के प्रफेसर वी कन्नन की आज्ञा पर यह कुआं खोदा गया था जो ब्राह्मण वर्ग की सेवा करता रहा है। 2014 में कन्नन के रिटायरमेंट के बाद इसने अपनी महत्ता खो दी, यह कुआं उनके क्वॉर्टर के पास था, कन्नन इस समय दो साल के विस्तार पर हैं। लेकिन आज भी यह कुआं वहां मौजूद है जो अब यूनिवर्सिटी के आंदोलन में शामिल है। दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद इसको लेकर आंदोलन तेज हो गया है।

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यूनिवर्सिटी की जॉइंट ऐक्शन कमिटी के कोऑर्डिनेटर वेंकटेश चौहान का कहना है, ‘हैदाबाद यूनिवर्सिटी जातिय भेदभाव से घिरी हुई है। वेमुला के मुद्दे ने शोषित वर्ग को अपनी आवाज उठाने का मौका दिया। हम मांग करते हैं कि अपमान के प्रतीक उस कुएं को बंद किया जाए।’

यूनिवर्सिटी में इस समय पानी की कमी को लेकर इसे फिर से जीवित करने की बात हो रही है लेकिन इसको लेकर भी सहमति बनती नहीं दिख रही है। पॉलिटिकल सायेंस के प्रफेसर ई वेंकटेश कहते हैं कि इस कुएं का इस्तेमाल पानी की समस्या सुलझाने के लिए किया जाना चाहिए लेकिन सबसे पहले इसका नाम बदला जाना चाहिए और यूनिवर्सिटी को इसके खिलाफ सख्त ऐक्शन लेना चाहिए।

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यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार एम सुधाकर का कहना है कि छात्रों की सहमति प्रस्तुत करने के बाद कोई फैसला लिया जाएगा।


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