जुलाई, 2015 में शुरू हुआ पटेल आरक्षण आंदोलन में हार्दिक पटेल की अध्यक्षता में उभरकर सामने आया था, जिसके बाद गुजरात राज्य में हिंसा भी हुई और नौ महीने के लिए हार्दिक पटेल को देशद्रोह के केस में जेल रहना पड़ा था । इसी समय दौरान पाटीदार समुदाय की महिला युवा नेता रेश्मा पटेल भी उभर कर सामने आई । जो विशेषकर पटेल समुदाय पर कथित पुलिस अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और भाजप सरकार को घेरने में अग्रेसर रही। रेश्मा पटेल 21 दिसम्बर 2015 को पाटीदार समुदाय के जेल में बंद युवाओ की मुक्ति को लेकर 21 दिनों के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठी थी जिससे गुजरात की भाजपा सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ा था ।

हर्दिक पटेल के जेल के कारावास के दौरान वो रेश्मा पटेल ही थी जिन्होंने पटेल आंदोलन में जान फूंके रखी और भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और आंदोलन जारी रखा।

17 अप्रैल 2016 को मेहसाणा में जेल भरो आंदोलन सरदार पटेल ग्रुप की अगुवाई में हुआ। जिसमे पुलिस पेपर्स के मुताबिक रेश्मा पटेल के भड़काऊ भाषण से महेसाणा में हिंसा भड़क उठ्ठी थी जिसमे पुलिस कर्मियों पर भी हमला किया गया और सरदार पटेल ग्रुप के अध्यक्ष लालजी पटेल भी घायल हो गए थे। गुजरात सरकार ने रेश्मा पटेल को विविध धाराओं के तहत गिरफ्तार कर के साबरमती सेन्ट्रल जेल, अहमदाबाद में कैद कर लिया और 31 दिन के बाद शर्ती  ज़मानत पर उनकी रिहाई हुई।

सूत्रों के अनुसार, गुजरात में जहां भी पाटीदार आंदोलन के सम्बद्ध में समारम्भ का आयोजन होता हे वहां रेश्मा पटेल ही उन इलाको का, गांवों और शहरी क्षेत्रों का दौरा करती हैं ताकि लोगों को पाटीदार आंदोलन के कारणों से अवगत कराया जा सके और आयोजित प्रोग्राम को सफल बनाया जा सके। रेश्मा पटेल के भाषणों से पटेल समुदाय की भीड़ इकठ्ठी करने में पटेल अनामत आंदोलन समिति (पास) को मदद मिल रही थी वही रेशमा पटेल अपने भाषणों में गुजरात सरकार द्वारा पटेल समाज पर हुवे अत्याचारों से लोगो में भाजपा के विरोधी जनमत भी बना रही थी। जिससे उन पर ये भी आरोप लगे की वो परोक्ष रूप से गुजरात के विपक्षी दल की मदद कर रही हे ।

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पिछले कुछ महीनों से, रेश्मा पटेल पाटीदार समुदाय में हार्दिक पटेल के समांतर प्रतिभा के रूप में उभर रही हे । एक तरफ हार्दिक् पटेल ने अपनी शानदार जीवन शैली, सत्तावादी प्रकृति और अविनीत व्यवहार के कारण कुछ आलोचनाओं को आमंत्रित किया हे तो दूसरी और स्टेज पर आक्रमक नज़र आनेवाली रेश्मा पटेल अपनी निजी जिंदगी में अपने साथी और कार्यकर्ताओ के साथ विवेकशील और विनम्र व्यवहार करती दिखाई देती हे। पाटीदार समुदाय का एक बड़ा वर्ग ये भी मानता हे की रेश्मा पटेल ही एक मात्र नेता हे जो हार्दिक पटेल का स्थान ले सकती हे ।

पाटीदारो की समस्या के अलावा रेश्मा पटेल ने अन्य धर्म, समाज और वर्ग से जुड़े मुद्दों के लिए भी अपनी आवाज़ उठाई।गुजरात में आंगनवाड़ी डेली वेजर्स की पगार के मुताल्लिक प्रश्नो के निराकरण के विरोध प्रदशन के वक्त भी उनकी गिरफ्तारी हुई थी तथा हाल ही में गुजरात में दलित अधिकारों के लिए रेशमा पटेल, कनैया कुमार और जिग्नेश मेवानी की अगुवाई में निकाली गई आज़ादी कूच में भी उनकी गिरफ्तारी हुई थी । रेश्मा पटेल ने आगामी गुजरात विधानसभा चुनाव में ईवीएम मशीन के साथ वीवीपीएटी के उपयोग के लिए वकील कपिल सिब्बल के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की हे। हार्दिक पटेल जहाँ सिर्फ पाटीदार समाज में सिमित रहे वहीँ रेश्मा पटेल अन्य समाजो में भी स्वीकृति पाने लगी।

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हाल ही में पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) द्वारा 22.7.2016 को राजकोट में सोशल मीडिया के संयोजकों का सम्मेलन रख्खा गया था जिसमे रेश्मा पटेल उपस्थित नही थी। इस सम्मेलन में हार्दिक पटेल ने सैकड़ों स्वयंसेवकों की उपस्थिति में मंच से रेश्मा पटेल के विरुद्ध पहली बार जाहिर में टिपण्णीया की और सोशल मीडिया में काम कर रहे कार्यकारो से कहा के रेश्मा पटेल की तरफदारी और प्रशंसा के मेसेजेस बनाने से परहेज़ करे। हार्दिक पटेल ने रेशमा पटेल की कन्हैया कुमार के साथ मंच पर आज़ादी कच्छ  के दौरान उपस्थिति पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने पास समिति के सोशल मीडिया संयोजकों को चेतावनी दी कि वो अपने किसी भी पोस्ट में रेशमा पटेल का समर्थन ना करे । दर असल हार्दिक पटेल द्वारा रेश्मा पटेल की मंच से की गई इस आलोचना के बाद पास के कार्यकर्ताओ में हार्दिक पटेल के इस रवैये को लेकर काफी दुःख और असहमति पाई गई है।

सूत्रों के अनुसार, पिछले 2-3 महीनों से पास समिति के महत्वपूर्ण निर्णयों में समिति द्वारा रेशमा पटेल को नजरअंदाज किया जा रहा हे । इससे पहले भी जब पास समिति के कुछ सदस्य गुजरात कांग्रेस प्रमुख भरतसिंह सोलंकी से मिलने गए थे तब भी रेश्मा पटेल को भरोसे में नहीं लिया गया था जिस पर रेश्मा पटेल ने एतराज़ जताया था और उस मीटिंग में जाने वाले पास कनवीनर्स को पास और पाटीदार समुदाय का कोई समर्थन नहीं ऐसा कह कर उस मीटिंग को ही बेमानी करार दे दिया था और रेश्मा पटेल की गैर मौजूदगी में होनेवाली मीटिंग का विरोध किया था। इसके बाद भी पास समिति ने रेश्मा पटेल को राजनीतिक दलों से मिलने के लिए गठित समिति का हिस्सा नहीं बनाया । जिससे रेश्मा पटेल के समर्थको में हार्दिक पटेल प्रति काफी नाराज़गी देखने को मिल रही है।

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सूत्रों के अनुसार हाल ही में दिनांक 24.7.2017 के रोज़ गांधीनगर में पास समिति की एक मीटिंग का आयोजन हुआ था जिसमें रेश्मा पटेल ने हिस्सा लिया था , उस मीटिंग में रेश्मा पटेल ने पास समिति द्वारा उनको नज़र अंदाज़ किया जा रहा हे और सोस्यल मीडिया मीटिंग में मंच से उनके बारे में गलतबयानी हुई वगैरह मुद्दों को ले कर रेश्मा पटेल हार्दिक पटेल समेत पास समिति के सभी कन्विनर्स पर जमकर बरसी।

विश्वसनीय स्रोतों से यह भी जानकारी पर्याप्त हुई हे की हार्दिक पटेल और पास समिति के कन्वीनर्स रेश्मा पटेल को पास समिति से निष्कासित करने का तखता जमा रहे हैं या तो पास समिति के रेश्मा पटेल के प्रति रवैये से वो खुद भी पास समिति छोड़ सकती हैं लेकिन ये भी एक हकीकत हे की अगर रेश्मा पटेल अगर पटेल आंदोलन छोड़ती हे तो उनके समर्थकों की बड़ी संख्या भी इस आंदोलन से बाहर हो जाएगी और जिससे आंदोलन का कमज़ोर होना तय हे।


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