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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में जैसे शहर में भी गौरक्षकों की गुंडागर्दी जारी हैं. ताजा मामलें में एक शख्स को चमड़े के बैग के कारण कथित गौरक्षकों की गुंडागर्दी का सामना करना पड़ा हैं.

प्रॉडक्शन हाउस में क्रिएटिव डायरेक्टर बरुण कश्यप ने घटना की जानकारी देते हुए फेसबुक पर लिखा कि ‘दफ्तर जाने के लिए मैंने अंधेरी में अपने अपार्टमेंट के बाहर से एक ऑटो लिया. उस समय सुबह के करीब 11-11.30 का वक्त हो रहा था. मुझे रास्ते में एक बैंक के पास उतरकर नकद जमा करना था.

उन्होंने आगे लिखा, ‘ऑटो चालक ने बड़ी उत्सुकता से मेरी ओर देखा. उसने अंग्रेजी में पूछा कि मैं कहां से हूं. मैंने कहा कि मैं असम से हूं। थोड़ी देर बाद उसने कहा कि असम तो बांग्लादेश के पास है ना। मैंने फिर हां कह दिया. एक ट्रैफिक सिग्नल पर ऑटो चालक ने बरुण से कहा कि उनके बैग से बदबू आ रही है.

उन्होंने आगे बताया, मैंने उससे कहा कि बारिश में जब बैग गीला हो जाता है, तो कई बार उससे बदबू आने लगती है.  उसे यकीन नहीं हुआ और उसने मेरा बैग छूकर देखा. फिर उसने पूछा कि क्या मेरा बैग गाय के चमड़े से बना है. मैंने बताया कि मेरा बैग ऊंट की खाल से बना है, लेकिन उसे भरोसा नहीं हुआ और वह मुझसे बहस करता रहा.

वह आगे बताते हैं, ‘एक मंदिर के पास से गुजरते हुए उसने ऑटो रोका और कुछ लोगों की ओर इशारा किया. कुछ लोग आए और ऑटो के अंदर सिर घुसाकर मेरा बैग छूने लगे.  मैंने विरोध किया। उन्होंने मुझसे मेरा नाम पूछा. जब मैंने कहा बरुण, तो उन्होंने पूरा नाम पूछा.  जब मैंने अपना नाम बरुण कश्यम भूयान बताया, तो वे आपस में मराठी में बातें करने लगे. कश्यप सुनकर शायद उन्हें लगा कि मैं ब्राह्मण हूं. उन्होंने मुझसे पूछा भी कि क्या मैं ब्राह्मण हूं?’ ऑटो से उतरकर जब बरुण ने ऑटो का नंबर नोट किया, तो चालक ने उनसे कहा कि आज तो बच गए.


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