2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगे में मारे गए तीन ब्रिटिश नागरिक और एक भारतीय ड्राइवर केस के सभी 6 अभियुक्तों को स्पेशल कोर्ट ने बरी कर दिया। इन सभी की हत्या साबरकांठा जिले के प्रांतजी शहर में हुई थी। सबूतों के अभाव में इस मामले में सभी अभियुक्तों को कोर्ट ने बरी कर दिया। तीनों ब्रिटिश नागरिक की हत्या के बाद यूनाइडेट किंगडम सरकार ने गुजरात सरकार से नीतिगत स्तर पर सक्रिय गतिविधियों को बंद करने का फैसला किया था। अक्टूबर 2012 में ब्रिटिश सरकार ने गुजरात सरकार के साथ रिश्ते फिर से कायम किए थे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी के तहत इस मामले की जांच हिम्मतनगर डिस्ट्रिक्ट के प्रिंसिपल जज आईसी शाह कर रहे थे। शाह सभी अभियुक्तों पर आईपीसी की धारा 302(हत्या) और 307(हत्या की कोशिश) के तहत दोषी साबित करने में नाकाम रहे। शुक्रवार को जज ने कहा कि मेरे पास कोई विकल्प नहीं है इसलिए मैं सभी आरोपियों को बरी कर रहा हूं।

 गुजरातः विदेशियों को जिंदा जलाने के सारे आरोपी बरीगोधरा स्टेशन पर ट्रेन की बोगी में आग लगने वाली घटना के एक दिन बाद 28 फरवरी 2002 को इमरान दाऊद और यूके में रह रहे इनके चाचा सईद दाऊद, शकील दाऊद और मोहम्मद असावत पर दंगाई भीड़ ने प्रांतजी में हमला बोला था।

सईद, शकील, मोहम्मद असावत और इनके कार ड्राइवर यूसुफ पिराघर और एक स्थानीय को दंगाई भीड़ ने नैशनल हाइवे आठ पर जिंदा जला दिया था। इमरान पुलिस की मदद से खुद को बचाने में कामयाब रहे था। इस मामले से सभी आरोपी- मिठनभाई पटेल, चंदू ऊर्फ प्रह्लाद पटेल, रमेश पटेल, मनोज पटेल, राजेश पटेल और कुलाभाई पटेल सभी प्रांतजी शहर के रहने वाले हैं।

182 पन्नों को आदेश में स्पेशल ट्रायल कोर्ट का कहना है कि सभी गवाह आरोपियों को पहचानने में नाकाम रहे। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में जबकि अभियुक्तों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं, बरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। (नवभारत टाइम्स)


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