गुजरात सरकार ने पाटीदार आंदोलन से जुड़े 382 लोगों के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमे वापस ले लिए हैं. राज्य सरकार ने इन 382 लोगों के ख़िलाफ़ चल रहे 74 मुकदमे यकायक वापस लेने का फ़ैसला किया. यह फ़ैसला बीते हफ़्ते स्थानीय निकायों में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद लिया गया है.

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सरकार के प्रवक्ता और वरिष्ठ मंत्री नितिन पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने मुक़दमे वापस लेने का आदेश गृह मंत्रालय को दे दिया है.  पर, हार्दिक पटेल समेत जेल में बंद 14 लोगों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है. बीते साल गुजरात के पाटीदार समुदाय के लोगों ने आरक्षण की मांग करते हुए पूरे राज्य में आंदोलन चलाया था. इसके नेता हार्दिक पटेल को हिरासत में लेने के बाद हिंसा भड़क उठी थी. इसमें दस लोगों की मौत हो गई थी.

इसके कुछ दिनों बाद राजकोट में होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच का विरोध करने जा रहे हार्दिक पटेल को गिरफ़्तार कर लिया गया था. हार्दिक और उनके समर्थकों पर राष्ट्रद्रोह का अभियोग लगाया गया.  हार्दिक पटेल की अगुवाई वाले संगठन पाटीदार अनामत आंदोलन समिति राज्य सरकार के फ़ैसलों की आलोचना करती रही है.

समिति के वरुण पटेल ने कहा, “सरकार ने वे मुक़दमे वापल लिए हैं जो एक क्षण भी अदालत में नहीं टिक सकते. हम उन लोगों की रिहाई की मांग करते हैं जो जेल में बंद हैं. सरकार पटेल समुदाय को बांटना चाहती है.” आंदोलन के बाद 1,700 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था, पर 14 को छोड़ सब को ज़मानत मिल गई थी.

पटेल समुदाय गुजरात का सबसे संपन्न और मजबूत वर्ग माना जाता है. गुजरात की कुल जनसंख्या की लगभग 15 फ़ीसदी आबादी पटेलों की है. समझा जाता है कि गुजरात के ज़िला और पंचायत चुनावों में बीजेपी की हार की मुख्य वजह पटेलों की नाराज़गी है.

पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के लोग अपने नेताओं की रिहाई की मांग पर बीते हफ़्ते भर से भूख हड़ताल कर रहे थे. कांग्रेस पार्टी ने भी पटेल नेताओं की रिहाई के लिए पांच जनवरी को बड़ी रैली करने का ऐलान कर रखा था. कई लोगों का मानना है कि इस वजह से ही मुख्यमंत्री ने मुकदमे वापस लेने का फ़ैसला किया. साभार: बीबीसी हिंदी


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