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गुजरात के अरावली जिले के चोएला गांव में पटेल समुदाय द्वारा दलित समुदाय के लोगों का बहिष्कार करते हुए उन्हें हर तरह का रोजगार छिनने का फरमान जारी किया गया हैं.

फरमान में कहा गया है कि पटेल समुदाय सहित गांव का कोई भी समुदाय दलितों को खेतों में काम नहीं देगा. अन्यथा 10 हजार रु. का जुर्माना देना पड़ेगा. ये फरमान दिवाली पर दलितों द्वारा जलाए गए पटाखों से पटेल समुदाय का एक व्यक्ति घायल हो जाने की घटना के बाद आया हैं.

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दिवाली के दिन कुछ दलित पटाखे जला रहे थे ऐसे में पटेल समुदाय का एक व्यक्ति घायल हो गया था. जिसके बाद स्थानीय पुलिस ने दोनों पक्षों में समझोता कराते हुए दोनों समुदाय के लोगों को ही मैत्रीपूर्ण ढंग से मुद्दे को सुलझाने को कहा था.

लेकिन पटेल समुदाय के लोगों ने मंदिर में इकठ्ठे होकर दलितों के आर्थिक बहिष्कार का फरमान जारी कर दिया. इस फरमान के संदर्भ में दलित समुदाय ने गांव के जिलाधिकारी को एक मेमोरेंडम सौंपा है. जिसमें दलितों को इस आर्थिक संकट से जूझने के लिए रोजागर देने का अनुरोध किया गया है.

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बता दें कि चोएला गांव में पटेलों के करीब 1500 परिवार हैं। वहीं लगभग 1000 दलित परिवार इस गांव में हैं जो पटेल समुदाय के खेतों में काम कर अपना गुजारा चलाते हैं.

बायड़ गांव के जिलाअधिकारी आरबी गमेती ने बताया कि दलित समुदाय से मिली शिकायत को हमनें पुलिस कार्रवाई के लिए भेज दिया है. सब-इंस्पेक्टर एनजे जडेजा ने कहा है कि हमने दोनों समुदाय से आपसी सहयोग से मामले को निपटाने को कहा है.

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