गुजरात दलित

गुजरात के ऊना में भगवा संगठनों द्वारा कथित गौरक्षा के नाम पर ऊना में दलितों की पिटाई की घटना के बाद दलितों का विरोध बड़ता ही जा रहा हैं. अब राज्य में दलितों के एक संगठन ने उनसे पूरे राज्य में मरे जानवर नहीं उठाने का आहवान किया है. मेहसाणा के 19 गांवों के दलितों ने तो ज़िलाधिकारी को लिखित में इस फ़ैसले के बारे में सूचित किया है.

गुजरात दलित पैंथर्स नामक इस संगठन ने राज्यव्यापी आंदोलन का आहवान करते हुए कहा ऊना की घटना के विरोध में 31 जुलाई को अहमदाबाद में एक महारैली का आयोजन किया गया है.

दलित संगठन के नेता जीज्ञेश मेवाणी ने कहा, “जो निर्णय मेहसाणा के दलितों ने लिया है, उसे और ज़िलों के दलितों का भी समर्थन मिल रहा है.उन्होंने आगे कहा, अब सभी ज़िलों के दलितों से अपील की गई है कि वो मरे जानवर न उठाएं और इस मामले में ज़िलाधिकारियों को बताया जाएगा.

मेवाणी का कहना है कि इस आंदोलन के तहत ही गुजरात के छह महानगर की पालिकाओं के सफाई कामगारों को एक हफ़्ते के लिए सफ़ाई का काम छोड़ देने के लिए भी कहा गया है. उन्होंने आगे कहा, यह हमारा विरोध प्रदर्शन है और समाज में हमारी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, ये जताने की कोशिश है.

दलितों के इस आंदोलन को पहली बार गुजरात के मुस्लिम संगठनों का भी सहयोग मिल रहा है. जनसंघर्ष मंच के नेता शमशाद पठान के अनुसार, गुजरात में दलितों और मुसलमानों के हालात एक जैसे हैं. दोनों समुदाय के लोग पीड़ित हैं, इसी कारण से हमने इस आंदोलन को समर्थन दिया है.

साभार: बीबीसी हिंदी


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