राजस्थान विधानसभा में भाजपा के ही वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने कई मसलों पर अपनी ही सरकार को घेरा। उन्होंने जयपुर में मंदिरों को तोड़ने, गौशालाओं के अनुदान बढ़ाने और वेद विद्यालयों को संरक्षित करने की मांग उठाई।

राजस्थान विधानसभा में भाजपा के ही वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने कई मसलों पर अपनी ही सरकार को घेरा। उन्होंने जयपुर में मंदिरों को तोड़ने, गौशालाओं के अनुदान बढ़ाने और वेद विद्यालयों को संरक्षित करने की मांग उठाई। इसके साथ ही तिवाड़ी ने खुद को आरएसएस का कहा और उसकी विचारधारा को फैलाने पर जोर दिया। उन्होंने जेएनयू में देश विरोधी नारों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने राजस्थान में सवर्ण वर्ग के लिए 14 फीसद आरक्षण को फौरन लागू करवाने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि प्रदेश में जातीय फसाद नहीं हो इसके लिए सरकार को आरक्षण की समस्या का समाधान करना चाहिए।

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राज्य विधानसभा में गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण की बहस के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कट्टर विरोधी भाजपा के ही पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक तिवाड़ी ने हिस्सा लिया। तिवाड़ी ने जयपुर शहर में पिछले दिनों मेट्रो के लिए तोडेÞ गए मंदिरों का मसला जोर शोर से उठाया। इस मामले में उन्होंने अपने ही दल के उन मंत्रियों और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी से भी सहयोग की अपील की जो शहर से ही विधायक भी हैं। तिवाड़ी का कहना था कि किसी भी काल में जयपुर में मंदिर नहीं तोडेÞ गए।

उन्होंने शहर के प्रतिष्ठित रोजगारेश्वर मंदिर को तोडेÞ जाने पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने इस मामले की गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि इसका खुलासा होना चाहिए कि उस समय तत्कालीन पुलिस कमिश्नर, जयपुर कलेक्टर और सीएमओ के बीच कितनी बातचीत हुई। तिवाड़ी ने सरकार को चेताते हुए कहा कि आगामी शिवरात्री को इस मंदिर में लोग अभिषेक करेंगे, उन्हें नहीं रोका जाए। उन्होंने सरकार से मांग कि की तोडेÞ गए मंदिरों की विधि विधान के साथ फिर से स्थापना कराई जाए।

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तिवाड़ी के भाषण को लेकर गुरुवार को भाजपा और कांग्रेस के साथ ही सभी राजनीतिकों को खासी उत्सुकता थी। तिवाड़ी ने अभिभाषण में दिए गए ऋग्वेद के एक मंत्र जिसमें आओ साथ चले को गलत करार देते हुए उसे संशोधित करने की भी बात कही। इसके लिए उन्होंने विधानसभा उपाध्यक्ष को अलग से लिख कर देने के साथ ही यह बात मुख्यमंत्री तक भी पहुंचाने का आग्रह मंत्रियों से किया।

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इसी दौरान उन्होंने यह भी जिक्र कर दिया कि मुख्यमंत्री उनसे बात तो करती नहीं हैं इसलिए वे इसे अब उनके करीबी नहीं रहे संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ को नहीं देकर परिवहन मंत्री युनूस खान को दे रहे हैं। इस दौरान सदन में सदस्यों के बीच जोरदार हंसी भी छूट गई। गौरतलब है कि अब वसुंधरा राजे से राठौड़ की दूरी हो गई है और परिवहन मंत्री युनूस खान मुख्यमंत्री के करीबी हैं। इसका इशारा तिवाड़ी ने भी अपने भाषण में कर दिया। मुख्यमंत्री से दूरी के चलते ही राठौड़ का इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में ग्राफ गिरा हुआ है। (Jansatta)


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