राजस्थान हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस महेश शर्मा ने हाल ही में मोर को ब्रह्मचारी बताया था, साथ ही मोर द्वारा आंसुओं से प्रजनन करने का दावा किया था. जस्टिस शर्मा के इस बयान पर वन व पर्यावरण मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने कहा कि अगर आंसुओं से ही बच्चे पैदा होते तो देश में पता नहीं क्या हो जाता. वन्यजीवों, पक्षियों में मैटिंग से ही प्रजनन की बात सुनी है, या तो वे ज्यादा ज्ञानी है या हमें कम ज्ञान है. इसी के साथ खींवसर ने कहा कि लोकतंत्र में सबको अपने विचार रखने का अधिकार है. हालांकि उन्होंने मोर के प्रजनन पर रिपोर्ट मंगवाने से इनकार किया.

दरअसल, जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने सीएनएन-न्यूज18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा था, ‘मोर ब्रह्मचारी पक्षी है और वह मादा मोर के साथ कभी सेक्स नहीं करता है. मोरनी तो मोर के आंसू पीकर गर्भवती होती है. यहां तक कि भगवान श्रीकृष्ण भी अपने सिर पर मोर का पंख लगाते थे.’

वहीँ जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में केंद्र और राजस्थान सरकार को सुझाव दिया था कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि कोई गाय की हत्या करता है तो उसे आजीवन कारावास की सजा मिलनी चाहिए.


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