“बदलाव की उम्मीद पाले असम के छात्र अपने राज्य में पड़ोसी राज्य त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसा मुख्यमंत्री चाहते हैं। इनमें ज्यादातर मतदाता इस बार के चुनाव में पहली बार मतदान करेंगे।”
असम के छात्र मुख्यमंत्री के तौर पर एक ऐसा नेता चाहते हैं जो राज्य के समग्र विकास और सभी धर्मों के कल्याण के लिए काम करे। इस कसौटी पर छात्रों की सबसे पहली पसंद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार औऱ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं। तेजपुर विश्वविद्यालय की छात्रा उद्दीपना गोस्वामी ने परिसर में बताया, एक बात तो तय है कि हम बदलाव चाहते हैं। लेकिन हम बेहतरी के लिए बदलाव चाहते हैं। भारतीय जनता पार्टी कहती है कि वह बदलाव हैं, लेकिन हालिया कुछ घटनाओं ने हमें चिंता में डाल दिया है। उद्दीपना गोस्वामी ने कहा कि छात्रों को असम में आरएसएस के प्रवेश करने और क्षेत्रवाद पर राष्ट्रवाद को थोपने सहित लोगों के बीच सांप्रदायिक विभेद पैदा होने की चिंता है। उद्दीपना ने कहा, उदाहरण के तौर पर, पहले हम छात्रों को यह परेशानी नहीं होती थी कि कौन क्या खा रहा है। लेकिन विश्वविद्यालय में अब छात्र ऐसी बातें करते रहते हैं कि वह गोमांस खा रहा है, वह सुअर का मांस खा रही है, आदि। यह घातक है।

उनकी सहपाठी सुकन्या मजूमदार ने कहा कि भाजपा तरूण गोगोई सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रचार कर रही है, लेकिन वह भी उसी में शामिल है और किसी जमाने में प्रभावशाली कांग्रेस के मंत्री रहे हिमंत बिस्व सरमा को महत्व दे रही है। सुकन्या ने कहा, भाजपा का प्रचार केवल तरूण गोगोई के खिलाफ है। उन्होंने यह नहीं बताया है कि उनकी योजनाएं क्या हैं। वहीं, इससे अलग दरांग कॉलेज की हिमांका फुकन ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो खतरा हो सकता है। लेकिन, हमलोग यह खतरा उठाने के लिए तैयार हैं क्योंकि हमलोग बदलाव चाहते हैं। यह जुआ है। अगर भाजपा बेहतर प्रदर्शन नहीं करती तो अगली बार हम उन्हें भी मौका नहीं देंगे। फुकन ने कहा कि पिछले 15 साल में देश के अन्य हिस्सों की तुलना में राज्य में शिक्षा क्षेत्र में सुधार नहीं हुआ है।

फुकन की सहपाठी मयूरी बोरा ने कहा कि यह सच नहीं है कि कांग्रेस शासन के तीन कार्यकाल के दौरान असम में कोई विकास नहीं हुआ, लेकिन समय के साथ लोग और विकास चाहते हैं। उन्होंने कहा, हमलोग राहुल गांधी के विचारों से सहमत हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित हर कोई विकास की बात करता है। लेकिन केवल बातों से काम नहीं होता। उन्हें हमें यह यकीन दिलाना होगा कि वे विकास कैसे करेंगे। असम में 4 अप्रैल और 11 अप्रैल को दो चरणों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में करीब 6.75 लाख युवा मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग करने वाले हैं। तेजपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदान सोमवार को होगा। (outlookhindi)


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