अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों की पुलिस फायरिंग में हुई मौत के बाद मंदसौर से शुरु हुआ किसान आंदोलन पुरे राज्य में उग्र रूप ले चूका है. ऐसे में राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आंदोलन को भडकाने के पीछे कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा दिया. साथ ही उन्होंने किसानों की मांगे मागने की भी बात कही.

लेकिन इसके उलट किसानों को मुख्यमंत्री की बातों पर बिलकुल भी भरोसा होता नहीं दिख रहां है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब भी किसानों का आत्महत्या करने का सिलसिला बादस्तूर जारी है. आन्दोलन के बीच रायसेन जिले में किशन सिंह मीणा नाम के किसान ने कर्ज के बोझ तले सल्फास खाकर जान दे दी.

परिजनों के मुताबिक, किशन सिंह पर 15 लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज था. किसान ने बैंक से करीब साढ़े 10 लाख रुपए और स्थानीय स्तर पर भी चार से पांच लाख रुपए कर्ज लिया था. इसके अलावा बिजली के ट्रांसफार्मर का करीब दो लाख रुपए बकाया था.

परिजनों का कहना है कि बैंक वाले किशन पर कर्ज जमा करने का दबाव बना रहे थे. इस वजह से वह काफी दिनों से परेशान चल रहा था. उनका आरोप है कि बिजली विभाग द्वारा लगाया ट्रांसफार्मर भी बंद था, लेकिन उसके बिल लगातार आ रहे थे. बिजली के भारी-भरकम बिल ने किशन की परेशानी को बढ़ा दिया था.


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