एनबीटी को शिवसेना के यूपी प्रमुख अनिल सिंह और शिवसैनिक अरुण पाठक के बीच हुई बातचीत की एक ऑडियो क्लिप मिली है। क्लिप में अनिल दंगा, बवाल करवाने को कह रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर में हुई बातचीत की इस क्लिप की जांच खुद एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) दलजीत सिंह चौधरी कर रहे हैं।

अनिल सिंहअरुण मान रहे हैं कि क्लिप में उनकी आवाज है। पिछले साल सितंबर में प्रतिमा विसर्जन के मसले पर निकली प्रतिकार यात्रा में अरुण ने शिवसेना की अगुवाई की थी। बातचीत इसी संदर्भ में है। एनबीटी ने अरुण पाठक को ऑडियो क्लिप के अंश वॉट्सऐप पर भेजे। उन्होंने मान लिया है कि यह आवाज उन्हीं की है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि दूसरी आवाज शिवसेना के यूपी प्रमुख अनिल सिंह की है।

शिवसेना के यूपी प्रमुख को भी ऑडियो क्लिप भेजने के बाद फोन किया गया, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया।

अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) दलजीत सिंह चौधरी ने इस मामले में कहा कि ऑडियो क्लिप की जांच करवाई जा रही है। मामला गंभीर है। आवाज की पहचान होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

उधर, शिवसेना के सांसद चंद्रकांत खेड़े ने इस मुद्दे पर कहा, ‘शिवसेना ऐसी किसी गतिविधि को बढ़ावा नहीं देती। मैं अनिल से जवाब मांगूंगा। दोनों का आपसी विवाद रहा है, ऑडियो की सच्चाई जांचनी पड़ेगी।’

बातचीत के अंश

अनिल सिंह: दंगा-बवाल यही सब …(गाली)… करवाओ। जब तक यह सब नहीं करवाओगे, शिवसेना कैसे खड़ी होगी?

अरुण पाठक: गलत बात कहते हैं। शिवसेना बवाल नहीं चाहती। शिवसेना शांति, धर्म की रक्षा चाहती है।

अनिल🙁 हंसते हुए) शिवसेना बवाल चाहती है। धर्म की रक्षा तब होगी जब तुम गड़ासा उठाओगे, परशुराम बन जाओ।

अरुण: ऐसा नहीं है, धर्म की रक्षा के लिए मैं अपने संसदीय दल के नेता व तमाम लोगों को पत्र लिखने जा रहा हूं।

अनिल: लिखो-लिखो खूब कायदे से लिखो।

अरुण: एक नया कानून बने, जिसमें यह हो किसी भी धर्म व आस्था पर न्यायालय बोलने से पहले केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी ले। कैबिनेट पास करे तभी फैसला बाहर आए। हिंदू सहिष्णु हैं, साधु-संत की पिटाई सब सह लिए। किसी अन्य धर्म पर अदालत फैसला देती तो बवाल होगा।

अनिल: आप एक बात कहो, आप यह कहो कि हमारी धार्मिक आस्था व ऐसे मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप न करे, न्यायालय हमारी आस्था से ऊपर नहीं है।

अरुण: (बात काटते हुए) वह सब हो चुका है। अब पत्र लिखने जा रहे हैं। मांग करने जा रहे कि हमारे सांसद वह विचार करें, जिस तरह अन्ना हजारे के आंदोलन में रातोंरात फैसला दिया गया था, उसी तरह आस्था व धर्म का मामला उससे भी महत्वपूर्ण है, तत्काल इस पर एक नया कानून बने ताकि आस्था व धर्म के नाम पर न्यायालय फैसला देने से पहले कैबिनेट से मंजूरी ले।

अनिल: ऐसा है यह मोदिया…. (गाली)… एक शब्द बोलने से बचता है, बवाल इतना मचा है। तुम बोलो खूब बोलो, मोदिया को टारगेट पर लो। सांसद बोले, सांसद हमारे जवाब दो…..इस लइनिया को पकड़े रहो। अच्छा यह बताओ भाजपाइयों को जब तक …… नहीं बनाओगे चिढ़ाओगे नहीं तब तक मजा नहीं आएगा। (navbharattimes)


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