जिस गुजरात मॉडल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव में जनता के सामने पेश कर प्रधानमंत्री की कुर्सी हासिल की. उसी गुजरात मॉडल में मुसलमानों के लिए नौकरियों को प्रतिबंधित किया जा चूका है. सबका साथ, सबका विकास की बाते करने वाले पीएम मोदी के गृह राज्य में देश की विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया से इंजीनियरिंग में स्नातक छात्र को इसलिए नौकरी देने से इनकार कर दिया गया क्योंकि वह धर्म से मुसलमान है.

दिल्ली निवासी मोतासिर हसन और अबू नोमन ने बताया कि कंसल्टेंसी से मेल मिलने के बाद जब 26 जुलाई को वह साक्षात्कार के लिए पहुंचे तो उन्हें मुस्लिम होने की वजह से जॉब के लिए योग्य करार दिया गया. साथ ही यह भी बताया गया कि ऊपर से आदेश हैं कि एनटीपीसी गुजरात के लिए मुसलमानों की भर्ती न की जाए.

उन्होंने कहा कि महिला एचआर ने रेज़्यूमे देखते ही उनसे साफ कहा, “हम मुसलमानों की भर्ती नहीं कर रहे”.महिला एचआर से इसकी वजह बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसा करने के लिए ऊपर से निर्देश हैं. JDVL कंसल्टेंसी ने इस घटना की पुष्टि की. कंपनी की प्रवक्ता शुभरा ने कहा कहा कि यह फैसला गुजरात स्थित कंपनी के हित में था, जो कि उनके मुताबिक, एक सांप्रदायिक रूप से अस्थिरता वाला राज्य है.

उन्होंने कहा, “हम एनटीपीसी फर्म की भर्ती कर रहे थे जो गुजरात में स्थित है. अगर हम उन्हें (मुस्लिम युवकों) गुजरात भेजते हैं, तो इससे कंपनी के लिए समस्या पैदा हो सकती है. जबकि पंद्रह दिन पहले ही वहां सांप्रदायिक टकराव हुए थे. हालांकि, शुभरा ने इस आरोप का खंडन किया कि “ऊपर से आदेश” था.

इस घटना को लेकर सवाल उठाते हुए मोतासिर हसन ने कहा, “हम एनटीपीसी फर्म की भर्ती कर रहे थे जो गुजरात में स्थित है। अगर हम उन्हें (मुस्लिम युवकों) गुजरात भेजते हैं, तो इससे कंपनी के लिए समस्या पैदा हो सकती है। जबकि पंद्रह दिन पहले ही वहां सांप्रदायिक टकराव हुए थे। हालांकि, शुभरा ने इस आरोप का खंडन किया कि “ऊपर से आदेश” था।


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