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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने नोटबंदी की आलोचना करते हुए कहा कि नोटबंदी ब्लैकमनी की समस्या का हल नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इस बारें में यूपीए सरकार के दौरान भी विचार किया गया था लेकिन फिर इसे लागू न करने का फैसला लिया गया.

उन्होंने कहा कि करीब 17 लाख करोड़ रुपए तक की रकम काला धन नहीं है. यदि यह पैसा उन लोगों के हाथ में जाता है जो टैक्स नहीं देते, तब यह ब्लैक मनी हो जाता है और यदि यह उन लोगों के हाथ में जाता है जो टैक्स देते हैं, तब यह काला धन नहीं है.

उन्होंने आगे कहा कि नोटबंदी के जरिए के हम सिर्फ नोट को खत्म कर रहे हैं, उन्हें नहीं पकड़ रहे जिन्होंने टैक्स नहीं दिया है. इसके लिए हमारे पास आईटी विभाग है लेकिन वे अपना काम नहीं कर रहे हैं. गरीब नकदी का संचय करता है. वे अमीर जो टैक्स नहीं देते अपने तकिए के नीचे काला धन नहीं रखते हैं.

ब्लैकमनी को लेकर उन्होंने कहा कि अमीर लोग ब्लैक महनी को काफी तेजी से यहां से वहां ‘मूव’ कर लेते हैं. किस तरीके से पैसे को काले धन में बदला जाता है, वह प्रक्रिया अभी पकड़ में नहीं आई है. हम उनकी पहचान नहीं कर रहे जो टैक्स नहीं दे रहे. नोट बैन करके आप कॉस्ट बढ़ा रहे हैं और आम आदमी के अधिकार छीन रहे हैं.


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