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दोलत के लालच में बेजुबान उल्लुओं की बलि दी जा रही हैं. हिन्दू धर्म में लोगों का मानना हैं कि अगर लक्ष्मी पूजा के दौरान घर में उल्लू की बलि दी जाए तो लक्ष्मी घर में परिवार के साथ रहने के लिए मजबूर हो जाती हैं. ऐसे अन्धविश्वास में आकर बड़े पैअमाने पर उल्लुओं की बलि दी जा रही हैं.

दिवाली के मौके पर बलि के लिए बड़े पैमाने पर उल्लुओं की डिमांड होती हैं जिसके चलते एक उल्लू की कीमत 30 हजार तक भी पहुंच जाती है. दिवाली पर चांदनी रात में उल्लुओं की बलि देना शुभ माना जाता है. आगरा उल्लुओं के व्यापार का प्रमुख केंद्र हैं.

पक्षी विज्ञानी अबरार अहमद के अनुसार, उल्लुओं के व्यापार में शामिल लोगों का मानना है कि किसी अन्य जानवर से जुड़ा व्यापार करने के मुकाबले उल्लू का व्यापार करना ज्यादा फायदेमंद होता है. क्योंकि उल्लू काफी महंगे दामों पर बिकता है. इसकी डिमांड भी बहुत ज्यादा होती है. आमतौर पर काले जादू या दिवाली के मौके पर इसकी बलि दी जाती है.

पक्षी संरक्षण परियोजना के निदेशक बैजू राज के अनुसार, उल्लू का बलिदान धार्मिक मिथकों और अंधविश्वास से प्रेरित है. हालांकि हर साल कितने उल्लुओं का व्यापार होता इसका अंदाजा किसी को नहीं है.


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