मेवात कांड में पीड़ित परिजन

डिगंरहेड़ी गैंगरेप और हत्या मामले में चौतरफा घिरी खट्टर सरकार को आखिरकार सीबीआई जांच की मंजूरी देने के लिए मजबूर होना पड़ा. हाल ही में गुड़गांव में एक कार्यक्रम में सीएम खट्टर ने इस घटना को मामूली घटना बतााते हुए कहा था न्हें इन घटनाओं पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है.

सीएम खट्टर के इस बयान के बाद विपक्ष उन पर हमलावर हो गया था. राज्य भर में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी करते हुए जांच से जुड़े कुछ पुलिस अफसरों की भूमिका पर न केवल सवाल उठाए थे. बीजेपी सरकार के एक कद्दावर मंत्री पर आरोपियों को बचाने के संगीन आरोप लगे थे

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प्रदेश के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राम निवास ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने के फैसले की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि सरकार ने केंद्र को इस संबंध में चिट्ठी लिख दी है.

गौरतलब रहें कि 24 अगस्त को हुई इस घटना में करीब दस लोगों ने एक अल्पसंख्यक समुदाय के घर में घुसकर महिलाओं का बेरहमी से क़त्ल किया. उनके पति को उनके सामने ही मार डाला. इतना सबकुछ करने के बावजूद भी हैवानियत की साड़ी हदें पार करते हुए घर की दो युवतियों से भी बलात्कार किया था.

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पीड़ितों ने इस घटना में गौरक्षकों और आरएसएस के कार्यकर्ताओं के शामिल होने का आरोप लगाया था. पीड़ित ने घटना के बारें में बताते हुए कहा था कि ‘उन लोगों ने हमसे पूछा, तुम लोग गाय खाते हो. हमने कहा कि नहीं हम गाय नहीं खाते. लेकिन वो बोले कि तुम गाय खाते हो इसलिये हम ये कर रहे हैं.’ पीड़ितों के अनुसार वारदात से जुड़े दो आरोपी आरएसएस और गौरक्षा दल से जुड़े हुए हैं.

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