दिल्ली के पुलिस आयुक्त भीम सेन बस्सी ने सोमवार को कहा कि शुक्र है कि पुलिस दिल्ली सरकार के अधीन नहीं है नहीं तो और भी स्थिति खराब होती.

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दिल्ली के पुलिस आयुक्त भीम सेन बस्सी ने सोमवार को कहा कि शुक्र है कि पुलिस दिल्ली सरकार के अधीन नहीं है नहीं तो और भी स्थिति खराब होती। सोमवार को पुलिस की सालाना प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली सरकार और उनके बीच चल रहे विवाद की छाया साफ दिखी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार के प्रमुख लोग नियम तोड़ेंगे तो उनके खिलाफ भी कानून के मुताबिक कार्रवाई करने में पुलिस नहीं हिचकेगी। उन्होंने दावा किया कि एफआइआर दर्ज होंगे तो आंकड़े बढ़ते दिखाई पड़ेंगे।

पुलिस आयुक्त ने कांफ्रेंस में महिलाओं की सुरक्षा पर दो टूक कहा कि घड़ियालू आंसू बहाने से काम नहीं चलने वाला इस पर विशेष ध्यान देते हुए समाज में जागरूकता फैलाना होगा। पुलिस आयुक्त बस्सी सोमवार को पूरी तरह अलग मूड में दिखे। आपराधिक आंकड़े से अलग अपनी रिटायरमेंट के करीब दो महीने बचने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि नौवीं क्लास से पुलिस की गतिविधियों से वे परिचित हैं। फिर नौकरी में लंबे समय से कई पदों पर रहते हुए उन्होंने देखा है कि दिल्ली पुलिस हमेशा कानून के मुताबिक काम करती है।

1861 के दिल्ली पुलिस एक्ट, 1966 में जीडी खोसला के नेतृत्व में आयोग बनने और फिर 1978 से नई व्यवस्था के तहत पुलिस के काम करने का मुद्दा उठाते हुए बस्सी ने कहा कि मैं दिल्ली पुलिस की बात करता हूं अन्य राज्यों की नहीं। अपने अनुभव के आधार पर मुझे लगता है कि दिल्ली पुलिस खुशकिस्मत है कि दिल्ली सरकार के अधीन वह नहीं है। नहीं तो स्थानीय दबाब ज्यादा होता और फिर स्थिति और खराब होती। उन्होंने गोवा में अपनी तैनाती के दौरान के एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि स्थानीय दबाव में छोटी-छोटी बातों पर बड़े अधिकारियों के स्थानांतरण और निलंबन करने की मांग आम हो जाती है। लगे हाथ मैं यह भी कह सकता हूं कि किसी भी प्रधानमंत्री या गृहमंत्री की रुचि सिर्फ दिल्ली में ही नहीं होगी। कानून के मुताबिक पुलिस काम करती है। पीछे भी करती थी, आगे भी करती रहेगी।

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से लेकर पूर्व कानून मंंत्री सोमनाथ भारती और जितेंद्र तोमर, विधायक जरनैल सिंह, अखिलेशपति त्रिपाठी, मनोज कुमार और कमांडो सुरेद्र कुमार खिलाफ चल रहे मामले के बाबत पूछे गए सवाल पर पुलिस आयुक्त ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। जिनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई बनी उनके खिलाफ कार्रवाई हुई जिनके खिलाफ कार्रवाई नहीं बन रही है उनके खिलाफ अभी कार्रवाई नहीं हो रही। सब कुछ कानून के मुताबिक होता रहा है और आगे भी होता रहेगा। इसमें कहीं से भी किसी का कोई दबाब नहीं था, न है और न रहेगा। दिल्ली पुलिस पर इस तरह के मामले में केंद्र का कोई दबाब नहीं है। पुलिस हमेशा मेरिट पर काम करती है। आयुक्त ने कहा कि देश की सेवा पुलिस के जिम्मे है, प्रधान होने के कारण वे भी देश सेवा करते हैं। रिटायरमेंट के बाद भी देश की सेवा करने से वे पीछे नहीं हटेंगे। यह किस रूप में होगा इसका निर्धारण 29 फरवरी के बाद होगा।

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित आयुक्त ने कहा कि उन्होंने अपनी तरफ से कई प्रयास किए आगे भी जो अधिकारी रहेंगे, प्रयास करेंगे। मगर इतना तय है कि जब तक समाज की चेतना नहीं जगेगी तब तक महिलाओं के खिलाफ आपराधिक वारदातें नहीं रुकेगी। आयुक्त ने कहा- मेरा तो यह भी मानना है कि महिलाओं के साथ पूरे विश्व में किसी न किसी रूप में भेदभाव होता है इसलिए घड़ियालू आंसू बहाने से काम नहीं चलता, उन्हें भी समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए देश के नीति नियामकों को और प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने 15 से 35 साल की युवतियों को आत्म रक्षा प्रशिक्षण लेकर खुद के साथ होने वाली वारदातों का मुंहतोड़ जबाब देने की बात कही। साभार: जनसत्ता


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