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इलाहाबाद,जामिया आरफिया में हर साल विदाई समारोह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, लेकिन इस साल की विदाई महफ़िल कुछ खास थी क्योंकि इसमें जामिया अज़हर से तशरीफ़ लाए हमारे अतिथि शिक्षक शेख अब्दुल लतीफ़ फर्गली शरीक थे जो केवल तीन साल के लिए यहां बच्चों को अरबी भाषा की विशेष शिक्षा देने के लिए आए हुए हैं जिन की तीन साल की मुद्दत करीब थी इसलिए यह समारोह उनके सम्मान के लिए था।इस कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों ने उनका धन्यवाद किया कि उन्होंने उक्त अवधि में अपने काम को अच्छी तरीके से निभाया।

विदाई समारोह के अंत में बंगाल से आए हुए अतिथि हज़रत मौलाना अनवार अहमद रिजवी ने अपने विचार रखे, इस में जामिया आरफिया और खानकाहे आरफिया दोनों के कामों को स्वीकार करते हुए मौलाना ने बताया कि मुसलमानों के तीन संस्थान हैं.एक है मस्जिद, जिस में आबदीन पैदा होते हैं, दूसरा मदरसा, जिस में आलिम तैयार होते हैं और तीसरा खानकाह जिस में सालकीन, मजज़ोबीन, आरफीन और वासलीन पैदा होते हैं, और यहां तीनों चीज़ें मोजूद हैं। मौलाना ने कहा कि दाई इस्लाम शेख अबू सईद छात्रों, शिक्षकों और खुद्दाम को देखकर नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और सहाबा का दौर याद आ जाता है।

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इस साल विदाई समारोह में जामिया के छात्रों ने जामिया अजहर के अतिथि शिक्षक शेख अब्दुल लतीफ़ फर्गली की खिदमत मंि एक स्वर्ण शील्ड प्रदान की जिसे शेख अबू सईद एहसान उल्लाह मुहम्मदी सफ़वी ने अपने हाथों प्रस्तुत किया। इसी तरह छात्र संगठन के अध्यक्ष मौलाना अली सईद सफ़वी और उपाध्यक्ष सैयद अजीज़ुल्लाह की खदमत में विशेष उपहार भेंट किया।

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इस कार्यक्रम में मिस्र के जामिया अज़हर से आये शिक्षक अब्दुल लतीफ़ फर्गली ने कहा कि यह तीन साल का अनुभव मेरे जीवन के अनुभवों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। में आजीवन जामिया आरफिया और भारत की याद अपने सीने में सुरक्षित रखूंगा। उन्होंने आंसू भरे आंखों से कहा कि अवधि पूरी हो गई है, इसलिए ना चाहते हुए भी मुझे जामिया आरफिया छोड़ना ही होगा, लेकिन सच बात यह है कि दिल इस के लिए तैयार नहीं है, मैं हमेशा आप की मोहब्बतों को याद रखूंगा।
जामिया के वाइस प्रिंसिपल मुफ्ती किताबुद्दीन रिजवी ने छात्रों से संबोधन में कहा कि पश्चाताप और माफी केवल यह नहीं है कि हम अपनी ज़बान से कुछ शब्द अदा कर दें बल्कि सच्चाई यह है कि अपने गुनाहों पर लज्जित हों और आगामी न करने का मुकम्मल इरादा हो। मुफ्ती साहब ने कहा कि आप लोग मौत को हमेशा याद रखें, मौत की याद सभी नेकियों की कुंजी। मुफ्ती साहब ने यह भी कहा कि जामिया आरफिया का सालाना पोस्टर नहीं छपता है। हमारा पोस्टर हमारे छात्र हैं। इस लिए आप लोग जहाँ भी जाएँ अच्छे अखलाक पेश करें।

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जामिया आरफिया वार्षिक विदाई महफ़िल अपनी तरह का एक अनूठा महफ़िल है। शैक्षणिक वर्ष के अंत में ये महफिल आयोजित होती है और शिक्षकों और छात्र एक दुसरे से अपनी गलतियों की माफ़ी मांगते हैं और हमेशा भाई चार्गी और मुहब्बत से रहने का संकल्प लेते हैं।


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