dead-body-burnt-in-hut
सांकेतिक फोटो

रायगढ़। समाज में आज भी कुष्ठ को छुआछूत की नजरों से देखा जा रहा है। इतना ही नहीं अगर किसी को बीमारी हो रही है तो उसे गांव से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। ऐसा ही मामला चंद्रपुर के निकट ग्राम पंचायत हरदी के भैंसामुहा में सामने आया। जिसमें वृद्ध ग्रामीण की मौत के बाद उसे परिजन का कंधा तक नसीब नहीं हुआ। बीमारी की पुष्टि के बाद उसे चार दिन पहले गांव से बाहर कर दिया गया था, जहां पर देखरेख के अभाव में ठंड और बीमारी से उसकी मौत हो गई। हद तो तब हुई जब उसके शव को झोपड़ी में ही जला दिया गया।चंद्रपुर से सटे ग्राम हरदी के भैंसामुहा में एक अजीब मामला सामने आया है। 70 वर्षीय ग्रामीण ठंडाराम चौहान के शरीर में कुछ दिन पहले कुष्ठ रोग होने की पुष्टि हुई थी। बताया गया कि उसके शरीर में फफोले पड़ जाते थे, जिसे इलाज कराने के लिए परिजन जब रायगढ़ के शासकीय अस्पताल पहुंचे तब उन्हें कुष्ठ होने की जानकारी मिली। ऐसे में परिजन बीते शनिवार को उसके लिए गांव के बाहर एक झोपड़ीनुमा मकान बनाकर उसे वहीं छोड़ दिया।

खास बात ये है कि गांव में पहले से ही नियम बना है कि किसी भी व्यक्ति को अगर कुष्ठ बीमारी हो तो उसे गांव से बाहर किया जाता है। ऐसे में चिकित्सकों ने जब उसके शरीर में कुष्ठ होने की पुष्टि की तो गांव वाले दबाव बनाने लगे कि उसे गांव से बाहर निकाल दिया जाए अन्यथा उसके परिवार के सदस्यों को आर्थिक दंड का भुगतान करना पड़ेगा।मृतक की बहू संतोषी चौहान ने बताया कि गांव वालों की समझाइश पर वृद्ध के लिए गांव से बाहर एक झोपड़ी बनाई गई और उसमें वृद्ध को बीते शनिवार से रखा गया। तीन दिन काटने के बाद आखिरकार उसने मंगलवार को दम तोड़ दिया। चूंकि गांव का नियम है कि कुष्ठ रोगी को कोई कंधा नहीं देता, लिहाजा जब उसकी मृत्यु की खबर गांव में फैली तब उसके लिए बनाई गई झोपड़ी में ही अर्थी तैयार कर वहीं उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सालों से चल रहा रिवाज
____________________
भैंसामुहा गांव का यह पहला मामला नहीं है जिसमें वृद्ध की शव परिजन के कंधे को तरसी है। मृतक की बहू संतोषी चौहान बताती है कि ऐसे कई लोग जो कुष्ठ के शिकार हुए हैं उन्हें गांव के बाहर रखा जाता है। वहीं उसकी मौत के बाद मकान में ही उसे जला दिया जाता है। हालांकि उसने यह भी बताया कि उसे याद नहीं है कि उसके ससुर से पहले और किस व्यक्ति को कुष्ठ हुआ था। उसकी बहू का ये भी मानना है कि अगर ग्राम पंचायत की शर्त अगर कोई नहीं मानता है तो उसे दंड भुगतना पड़ता है।
चल रही दशकर्म की तैयारी
____________________
एक तरफ जहां वृद्ध व्यक्ति के शरीर में बीमारी होने पर उसे बाहर का रास्ता दिखाया गया है। दूसरी ओर वृद्ध की मौत के बाद परिजन अब दशकर्म की तैयारी में जुट गए हैं। बताया गया कि दशकर्म में पूरे गांव वालों को भेज दिया जाएगा। इसके अलावा एक बात ये भी सामने आई है कि अगर बीमारी की पुष्टि के बाद उसे घर से बाहर नहीं किया जाता तब गांव वालों को उसकी मौत से पहले ही आर्थिक दंड के साथ भोज दिया जाता है।
फेसबुक में हुआ वायरल
____________________
सनसनीखेज मामला तब प्रकाश में आया जब सोशल साइट फेसबुक में इसका खुलासा किया गया। मामला वायरल होने के बाद पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ था। मामला वाट्स अप और ट्वीटर भी कुछ देर बाद वायरल हो गया।
नहीं हो पाई कलेक्टर से बातचीत
____________________
मामला सामने आने के बाद जांजगीर-चांपा कलेक्टर ओपी चौधरी से उनके मोबाइल नम्बर पर लगातार संपर्क किया गया, मगर उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

Facebook Comment

Related Posts

loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें