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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दलित उत्पीडन के खिलाफ दिए गए बयानों का दबंगों पर कोई असर होता नहीं दिख रहा हैं. मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक युवक को दलित होने की वजह से उसकी पत्नी का अंतिम संस्कार श्मशान में नहीं करने दिया गया.

प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव ‘पारासर की गढ़ी’ में रहने वाले बबूल की पत्नी की 8 अगस्त को सूरत में टीबी से मौत हो गई. पत्नी का अंतिम संस्कार अपने पैतृक गांव करने के लिए बबूल अगले दिन शव को लेकर ‘पारासर की गढ़ी’ पहुंचा. पैतृक गांव पहुंचने पर बबूल को पता चला कि गांव में श्मशान की जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है और वो वहां खेती कर रहे हैं.

जिसके कारण इस इस परिवार को बहू के अंतिम संस्कार के लिए कहींं जगह नहीं मिली. 24 घंटे के इंतजार के बाद परिवार को घर के सामने ही बहू का अंतिम संस्कार करना पड़ा.

गांव के सरपंच राय सिंह तोमर भी रसूखदारों के आगे खुद को बेबस पाते हैं. सरपंच के मुताबिक, श्मशान घाट के लिए एक बीघा जमीन सुरक्षित है, लेकिन इस पर कब्जा कर कुछ लोग खेती कर रहे हैं. सरपंच ने आगे बताया कि कई बार वह इस जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.


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