देश में गौहत्या पर लोगों की जान ली जा रही है. हालाँकि ये सजा सिर्फ दलितों, आदिवासियों और मुस्लिमों के लिए मुकर्रर है. जिन्हें केवल शक के आधार पर ही मौत के घाट उतार दिया जाता है. वहीँ दूसरी और ब्राह्मण के लिए अलग कानून है.

मामला मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले का है. दुम्बर गांव में मोहन तिवारी नाम के युवक ने गाय की हत्या कर दी. दरअसल ये गाय पडोसी की थी. जो बार-बार उसके खेत में दाखिल हो रही थी. आखिर में उसने परेशान होकर धारदार हथियार से गाय की हत्या कर दी.

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गाय की हत्या की खबर पुरे जिले में आग की तरह फैली. गौहत्या पर पंचायत बैठी. बड़े-बड़े पंडित, पुजारी और धर्मगुरु शामिल हुए. लेकिन जैसे ही पत्ता चला कि गौहत्या करने वाला शख्स ब्राह्मण है तो पंचायत में ख़ामोशी छा गई. आखिर में पंचायत ने फैसला सुनाया कि तिवारी को गंगा नहा कर भोज खिलाना होगा, उसके लिए गौहत्या की यही सज़ा है. हालांकि इस मामले  गाय के मालिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

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इंस्पेक्टर कैलाश बाबू आर्य ने बताया कि शंकर अहीरवार ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई.  पोस्टमॉर्टम कराने के बाद यह पता चला कि उसकी मौत घायल होने से हुई थी. इसके बाद  तिवारी के खिलाफ मध्य प्रदेश गौ-वध प्रतिबंध कानून (Madhya Pradesh Prohibition of Cow Slaughter Act) के तहत मामला दर्ज किया गया..


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