प्रेम प्रसंग के चलते हिंदू लड़की द्वारा इस्लाम धर्म अपना कर मुस्लिम युवक से शादी करने के मामले में दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने आरोपी शख्स को रेप और अपहरण के संगीन आरोपों से बरी कर दिया है.

दरअसल, पिछली 9 जुलाई लडकी के भाग जाने पर उसकी माँ ने ईस्ट दिल्ली के कल्याणपुरी पुलिस थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था. साथ ही अपहरण की आशंका भी जताई थी. पांच महीने बाद पुलिस ने लड़की को पश्चिम बंगाल से बरामद किया था. वह पाने प्रेमी के साथ रह रही थी. पुलिस दोनों को दिल्ली लेकर आई और युवक के खिलाफ खिलाफ अपहरण, जबरदस्ती विवाह और पोस्को एक्ट की धारा 6 के अंतर्गत मामला दर्ज किया था.

इस मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अश्वनी कुमार सरपाल ने अपने फैसले में कहा कि मुस्लिम लॉ के अनुसार, 14-15 वर्ष की उम्र में लड़की को बालिग़ माना जाता है और वह शादी के लायक हो जाती है. ऐसे में धर्मांतरण के बाद, लड़की 17 साल की उम्र में  मुस्लिम लड़के से शादी करने के लिए सक्षम थी.

इसके अलावा लड़की ने अपने बयान में कहा, “वह खुद से आरोपी के साथ गई थी और वह उससे शादी करना चाहती थी, लेकिन उसके परिवारवाले इसके लिए तैयार नहीं थे. लड़की ने अपने बयान में खुद के बालिग होने का दावा किया. साथ ही आरोपी के खिलाफ लड़की के बयान में भी कोई अभियुक्त साक्ष्य नहीं है.

न्यायाधीश ने पिछले दो फैसलों दिल्ली सरकार बनाम उमेश जिस पर दिल्ली हाई कोर्ट में 21 जुलाई 2015 को और श्याम कुमार बना राज्य में लोवर कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि दोनों मामलों में, यह साबित हो गया था कि नाबालिग लड़की ने अपने अभिभावक का घर छोड़ दिया था और आरोपी के साथ रिलेशन में प्रवेश किया. इसलिए अपहरण या यौन उत्पीड़न का ‘कोई अपराध नहीं’ माना जा सकता है.


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