सेना के मेजर लेतुल गोगोई को हाल ही में जम्‍मू-कश्‍मीर में उपचुनाव के दौरान कथित तौर पर पत्‍थरबाजी रोकने के लिए वोट देकर आ रहे कश्मीरी युवक फारुक डार को अर्नी जीप के आगे बांधे जाने पर सेना ने सम्मानित किया है. इसी बीच अब फारुक डार ने इस मामलें की राज्‍य मानवाधिकार आयोग में शिकायत की है.

जीप के आगे बंधकर घुमाने का ये वीडियो जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट किया था. जिसके बाद भारत में ही नहीं दुनिया भर में इसको लेकर सवाल उठे थे. बडगाम जिले का रहने वाले डार ने गोगोई को सम्मानित करने पर कहा कि ‘यहाँ इंसाफ को ज़मीन पर रौंदा जाता है और ज़ुल्म करने वालों की मदद की जाती है.’ डार ने कहा कि उन्हें जीप के बोनट पर मानव ढाल की तरह बांधने वाले अधिकारी को सज़ा मिलनी चाहिए.

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दूसरी तरफ़ मेजर गोगोई ने दावा किया है, ‘फ़ारूक़ अहमद डार सेना पर पत्थर फ़ेकने वालों को उकसा रहे थे और उन्हें जवानों ने काफ़ी मुश्किल से पकड़ा था.’ मीडिया से बात करते हुए गोगोई ने कहा है, ‘जैसे ही उन्होंने अपने जवानों को डार को जीप में बांधने का हुक्म दिया पथराव रुक गया और सेना की टुकड़ी वहां से निकलने में कामयाब रही.’ सेना के अधिकारी का कहना है कि डार को जीप से बांधने की वजह से ‘वो बहुत से लोगों की जानें बचा पाए क्योंकि अगर वो पथराव कर रही भीड़ पर गोली चलाने का हुक्म देते तो कम से कम दर्जन भर लोगों की मारे जाने का ख़तरा था.’

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वहीँ डार का दावा है कि वह उपचुनाव में मतदान करने आए थे. उन्होंने कहा, ‘मैंने वोट भी डाला था फिर भी मेरे साथ ज़ुल्म हुआ और मुझ पर ज़ुल्म करने वाले को सम्मानित किया जा रहा है.’


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