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हरियाणा के मुस्लिम बहुल इलाके में बिरयानी में बीफ की जांच को लेकर आलोचना का सामना झेल रही खट्टर सरकार ने राज्य के ‘गौ सेवा आयोग’ को कानून-कायदे अपनाने की सलाह दी हैं. जिसके बाद खट्टर सरकार अपने खुद के बनाये हुए जाल में फंस  चुकी हैं.

दरसल  गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष भनी राम मंगला के आदेश पर मेवात में बिरयानी में बीफ की जांच को लेकर सैंपल उठाये गए थें. भारी आलोचनाओं के बाद मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि आयोग को सैंपल इकठ्ठे करने की अनुमति नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि केवल फूड ऐंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को फूड सैंपल्स लेने की इजाजत है.

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अब सवाल ये उठता हैं कि यदि आयोग को सैंपल इकठ्ठे करने की अनुमति नहीं थी तो किस आधार पर सैंपल इकठ्ठे किये गए. और इसका मकसद क्या था ? साथ ही सैंपल लेने के समय पर भी सवाल उठ रहा हैं. क्योंकि सैंपल लेने की कारवाई ईद उल अजहा से पहले की गई हैं.

सरकार की इस कारवाई से स्पष्ट हैं कि हरियाणा सरकार और गौ सेवा आयोग ईद के पहले मुस्लिम समुदाय में दहशत पैदा करना चाहता था. जिसके लिए ये सब किया गया.

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