New Delhi, Jan 23: एक कहावत है कि दुश्मन को उसी के हथियार से मारो, दिल्ली की Arvind Kejriwal सरकार भी इसका बखूबी पालन करती दिख रही है। Arvind Kejriwal सरकार ने BJP सांसद Subramanian Swamy के खिलाफ 5 साल पुराने एक मामले में मुकदमा चलाने की इजाजत दे दी है जिसे Swamy खत्म कराने की कोशिश में लगे थे। यहां पर जरा दो बातों पर गौर करिए…पहली ये कि Swamy पुराने मामलों को अदालत की दहलीज पर ले जाने के माहिर हैं, दूसरे पुराने मामले को लेकर ही केजरीवाल के प्रमुख सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर सीबीआई छापे पड़े थे जिसे केजरीवाल ने बीजेपी सरकार के इशारे पर कार्रवाई बताया था। अब Swamy पर Kejriwal सरकार ने बड़ी चालाकी से उन्हीं के हथियार से वार किया है और पुराने मामले उठाने पर बीजेपी को भी जवाब दे दिया है।

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Subramanian Swamy पर साल 2011 में एक अखबार में लिखे लेख के जरिए धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा था। तब दिल्ली में केंद्र में यूपीए की सरकार थी और राज्य में शीला दीक्षित की सरकार थी। उस दौर में Delhi Police ने एक चार्जशीट तैयार की थी जिसमें Swamy पर अपने लेख के जरिए ‘विभिन्न समुदायों के बीच असामंजस्य, दुर्भावना और शत्रुता को बढ़ावा देने’ का आरोप था।

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Subramanian SwamySubramanian Swamy का ये विवादित लेख मुंबई के एक अखबार में साल 2011 में छपा था और इसका शीर्षक था ‘इस्लामिक आतंकवाद को कैसे खत्म करें’। इस लेख पर पांच अगस्त, 2011 को राष्ट्रीय अल्पंख्यक आयोग की ओर से एक शिकायत Delhi Police कमिश्नर को भेजी गई थी। अल्पसंख्यक आयोग ने Delhi Police को लिखे पत्र में कहा था कि स्वामी का लेख नफरत फैलाने वाला है, आपराधिक मामले की श्रेणी में आता है और इस मामले में कार्रवाई की जाए। इस पर पुलिस ने27 अगस्त, 2011 को इस मामले में FIR दर्ज की थी। Delhi Police की ओर से दिल्ली सरकार के पास फाइल भेजी गई थी, और Kejriwal सरकार ने दिल्ली पुलिस की इस फाइल पर अपनी मुहर लगा दी है। दिल्ली सरकार ने कहा है कि जांच एजेंसी ने इस संबंध में जो साक्ष्य जमा किए हैं वो प्रथम दृष्टया यह साबित करते हैं कि यह मुकदमा दायर करने की इजाजत दी जाए। ये भी कहा गया है कि स्वामी ने अपने लेख में एक समुदाय विशेष के अधिकार छीने जाने की बात कह कर उनका अपमान किया है।

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