लखनऊ: बसपा ने मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी है। पिछले तीन महीने के भीतर पार्टी ने कई विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारी बदले हैं। इनमें कई पिछड़ों की जगह मुस्लिमों को मौका दिया गया है। सूत्रों के अनुसार बसपा करीब 100 मुस्लिम प्रत्याशियों के साथ 2017 की जंग में उतरने की तैयारी कर रही है।

M_Id_448725_Mayawati_.jpgmayawati

बसपा की कोशिश दलित-मुस्लिम के सहारे विधानसभा चुनाव की वैतरणी पार करने की है। इस दौरान 100 मुसलमानों के सहारे यूपी की जंग में बसपा उतरेगी। 2012 में 85 सीटों पर‌ मौका दिया गया था।

पार्टी की पूरी कोशिश सर्वसमाज में आधार बढ़ाने के साथ मुसलमानों को जोड़ने की है। बसपा सुप्रीमो की अनुमति के बाद हाल ही में फैजाबाद जिले के अयोध्या में पिछड़ा वर्ग के जयकरन वर्मा के स्थान पर बज्मी सिद्दीकी और गोंडा के गौरा में प्रभात वर्मा के स्थान पर अब्दुल कलाम को प्रभारी बना दिया गया।

प्रभात को-ऑर्डिनेटर रह चुके हैं। बहराइच के सात विधानसभा क्षेत्रों में से तीन और सीतापुर के 9 में से 3 के मुस्लिम प्रभारी हैं। बलरामपुर के चार विधानसभा क्षेत्रों में दो और गोंडा में सात में चार मुस्लिम प्रभारी बनाए गए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष और एमएलसी चुनाव में भी उसने देख लिया कि मुसलमान सपा की प्राथमिकता में नहीं है।

75 जिला पंचायत अध्यक्षों में सिर्फ 2 तो 36 एमएलसी में सिर्फ 4 मुसलमानों को ही मौका दिया। दूसरा, मुसलमान सपा से नाराज होने पर बसपा को स्वाभाविक पसंद मानता है। अगर, उसे अपने वर्ग का प्रत्याशी भी मिल जाए, तो उसके जुड़ने की संभावना और बढ़ जाती है।

इस समीकरण और 2017 में हर कीमत पर जीत को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने हाल में विधानसभा क्षेत्र के प्रभारियों का आकलन किया है। कई जगह प्रभारी बदले गए हैं और जीत की संभावना वाले नए मुस्लिम प्रभारी बनाए गए हैं।

रणनीति के तहत प्रभारियों में फेरबदल चल रहा है। पार्टी ने 2012 में 85 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे। इस बार यह संख्या 100 पहुंच सकती है।बसपा की कोशिश दलित-मुस्लिम के सहारे विधानसभा चुनाव की वैतरणी पार करने की है। (indiavoice)


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें