वाराणसी: विधानसभा 2017 में अपनी नैया पार लगाने के लिए बसपा मऊ सदर से बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के खिलाफ मनोज राय को मैदान में उतार रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इन दोनों के बीच जोरदार टक्कर होगी। क्योंकि दोनों की फितरत एक जैसी है। दोनों ही बाहुबली हैं और लंबे समय से राजनीति कर रहे हैं। यानी बसपा ने जैसे को तैसा की रणनीति के तहत मैदान फतह करने की तैयारी की है। मऊ से मनोज राय को प्रत्याशी बनाए जाने की पुष्टि आजमगढ़ के जोनल कोआर्डिनेटर मदन राम ने की है।

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मनोज राय का सियासी इतिहास

मनोज राय पहली बार 2000 में कोपागंज के ब्लाक प्रमुख बने। तब उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह बसपा में शामिल हो गए। 2002 में घोसी से बसपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा। फिर 2010 में जिला पंचायत सदस्य बने और अभी भी वह जिला पंचायत ही है।

क्या है इनका आपराधिक रिकार्ड

कहले हैं कि मनोज के चाचा रामदरस की 2005 में हत्या हो गई। इस हत्या में पवन यादव का नाम और पवन को अजीवन कारावास की सजा हुई थी। आपको बता दें कि हाल ही में पवन पेरोल पर बाहर आए थे कि उनकी हत्या हो गई। पवन की हत्या में मनोज को 120 क्च तहत नामजद किया गया है, तब से वह भागे-भागे फिर रहे हैं। इससे पहले 2009 में सपा के पूर्व विधायक कपिलदेव यादव की हत्या में भी मनोज को 120 क्च के तहत नामजद किया गया था। कपिलदेव हत्या कांड में मनोज को जेल हुई थी। (indiavoice.tv)


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