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उत्तर प्रदेश के डीजीपी सुलखान सिंह ने भारतीय पुलिस की तुलना में ब्रिटिश पुलिस को बेहतर करार देते हुए कहा कि बेहतर व्यवहार और ईमानदारी सहित कई मामलों में ब्रिटिश पुलिस हमारी वर्तमान पुलिस से ज्यादा बेहतर थी.

उन्होंने अपने इस दावे को मंजबूती से रखते हुए कहा कि ब्रिटिश पुलिस के खिलाफ पूरे स्वतंत्रता संग्राम और भारतीयों के संघर्ष की बात करें तो आपको कई उदाहरण मिल सकते हैं लेकिन आपको उनमें एक भी फर्जी केस, फर्जी एंकाउंटर, फर्जी सबूत और फर्जी जांच नहीं मिलेगी.

सिंह ने कहा कि अगर ब्रिटिश विदेशी और क्रूर थे, फिर भी आचार संहिता का पालन करते थे. ब्रिटिश जेलों में अंग्रेजी जेलर कैदियों के स्वास्थ्य और साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखता था जबिक कई इनमें भारतीय कैदी थे.

उन्होंने बताया, ब्रिटिश जेल में कैदियों को गुड़ दिया जाता था ताकि जेल की सफाई के दौरान उनके गले और फेफड़ो को सुरक्षित रखा जा सक. जो कैदी रस्सी बनाने का कार्य किया करते थे, उन्हें सरसों का तेल दिया जाता था जिससे कि वे अच्छे से अपने हाथों की मसाज कर स्किन की बीमारी से बच सकें.

डीजीपी ने काकौरी केस का उदाहरण देते हुए कहा कि ब्रिटिश पुलिस ने आरोपी के परिवार के किसी भी सदस्य को इस केस के चलते प्रताड़ित नहीं किया था जबकि आज की पुलिस संदिग्ध होने पर ही किसी के घर में बिना एफआईआर और शिकायत के घुस जाती है.

पुलिस विभाग की लाइब्रेरी और राज्य अभिलेखों से रिसर्च कर भारतीय पुलिस और ब्रिटिश पुलिस के काम करने के तरीकों का विश्लेषण करने वाले सुलखान सिंह ने कहा निश्चित तौर पर यह कहा जा सकता है कि जेल प्रशासन भारतीयों के हाथों से ज्यादा अंग्रेजो के हाथों में बेहतर था.


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