बोकारो नापिश तरीन कुरान पढ़ना चाहती थी, लेकिन दृष्टिहीन होने की वजह से ऐसा संभव नहीं था। झारखंड के शहर बोकारो की रहने वाली नापिश तरीन ने फिर अपने ही जैसे दूसरे लोगों के बारे में सोचा और कुरान को ब्रेल लिपि में लिखने की ठानी। 28 साल की नापिश ने वाराणसी के दृष्टिहीन लोगों के लिए बने स्कूल में अपनी शुरुआती पढ़ाई की। उन दिनों भारत के स्टील सिटी में ब्रेल स्कूल की सुविधा नहीं थी। फिर वह अपने शहर लौट आईं और बोकारो महिला महाविद्यालय से 2008 में ग्रैजुएशन किया।

नापिश बताती हैं, ‘कॉलेज के दिनों में मैं कुरान पढ़ने के लिए बहुत उत्सुक थी। मैंने अपने पिता और भाइयों से ब्रेल में उपलब्ध कुरान के बारे में पता करने के लिए कहा। मेरे पिता और तीनों भाइयों ने बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें ब्रेल में कुरान नहीं मिली। मेरे पिता ने कुरान की शिक्षा देने वाले कुछ लोगों से भी बात की, लेकिन उन्होंने इस विषय में दिलचस्पी नहीं ली। शायद इसकी वजह मेरा दृष्टिहीन होना भी हो सकता है।’
बोकारो की नापिश तरीन ने ब्रेल में लिखी कुराननापिश ने फिर कुरान को ब्रेल में लिखने की ठानी। इसके लिए उसे पहले एक हफीज (कुरान सिखाने वाले) की जरूरत थी। नापिश ने बताया, ‘तब मेरे पिता मुख्तार असलम ने फिर से मेरे लिए एक हफीज ढूंढ़ने की शुरुआत की। इस बार उन्हें सफलता मिली और तसलीम साहब मेरे हफीज बन गए।’

नापिश ने बताया, ‘हफीज तसलीम साहब के संरक्षण में मैंने 2005 में कुरान का मैंने ब्रेल में रुपांतरन शुरू किया और 2009 में इसे पूरा किया। चार साल का यह वक्त मेरे लिए आसान नहीं था क्योंकि इस दौरान मैं ग्रैजुएशन भी कर रही थी। मुझे काफी मेहनत करनी पड़ी। जिस दिन कुरान का ब्रेल में रुपांतरन पूरा हआ, वह दिन मेरी जिंदगी का सबसे खुशी का दिन था।’ (नवभारत टाइम्स)


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

Related Posts

loading...
Facebook Comment
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें