राजस्थान में प्रदेश भाजपा की नई टीम में इस बार संघ से जुडेÞ युवा नेताओं को जगह देने की तैयारी हो रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी अपनी कार्यसमिति के गठन की कसरत में जुटे हैं।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी अपनी कार्यसमिति के गठन की कसरत में जुटे हैं। इसके लिए परनामी संघ के साथ ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से लगातार मंत्रणा कर रहे हैं। संघ के दबाव के कारण ही प्रदेश भाजपा की नई टीम के गठन में देरी हो रही है।

राज्य में भाजपा की दूसरी बार कमान संभालने वाले अशोक परनामी इस बार अपनी टीम बनाने के लिए खासी जोर आजमाइश कर रहे हैं। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के बाद परनामी इस बार सक्रिय तौर पर संगठन को समर्पित नेताओं को पदाधिकारी बनाएंगे। इसके लिए परनामी ने संघ के प्रदेश पदाधिकारियों से भी राय मांगी है। सरकार में मंत्री और मंत्री के दर्जे वाले नेताओं को संगठन में पद नहीं दिए जाएंगे। परनामी ने साफ कर दिया है कि एक व्यक्ति एक पद के सिद्वांत का पालन किया जाएगा। प्रदेश में भाजपा सरकार इन दिनों निगम, आयोग और बोर्डों में राजनीतिक नियुक्तियां कर रही है। इसके साथ ही विधानसभा का बजट सत्र भी 29 फरवरी से शुरू हो जाएगा। बजट सत्र से पहले ही परनामी अपनी कार्यसमिति का गठन करने की कसरत कर रहे हैं।

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भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी के ज्यादातर विधायक संगठन में काम करने के बजाय सरकार का हिस्सा बनना चाहते हैं। इसके लिए कई विधायक लॉबिंग में भी लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने कई मंत्रियों के कामकाज से नाखुश हैं। इसके चलते ही विधायकों को लगता है कि जल्द ही राजे अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकती है। इस कारण ही परनामी अपनी कार्यसमिति के गठन को अभी टाल रहे हैं। राजे और परनामी के बीच कार्यसमिति के गठन को लेकर कई बार मंत्रणा भी हो चुकी है। प्रदेश में कई वरिष्ठ विधायकों को राजे ने मंत्री नहीं बनाया है। इनमें से कुछ विधायक तो प्रदेश अध्यक्ष परनामी से भी वरिष्ठ है। इसलिए उनके संगठन में पदाधिकारी बनने की भी कोई संभावना नहीं है। इन विधायकों ने केंद्रीय नेतृत्व तक कई मंत्रियों के कामकाज को लेकर भी शिकायत की है। विधायकों की शिकायत है कि मंत्रियों की कार्यशैली से पार्टी का जमीनी कार्यकर्ता खासा नाराज है। इससे ही सरकार की छवि भी बिगड़ रही है।

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भाजपा के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री वी सतीश प्रदेश में संगठन महामंत्री की भूमिका भी निभा रहे हैं। प्रदेश भाजपा में लंबे अरसे से कोई संगठन महामंत्री भी नहीं है। संगठन महामंत्री का पद संघ के किसी वरिष्ठ प्रचारक को सौंपा जाता है। इस पद के लिए संघ अपने किसी प्रचारक की तैनाती करने में इच्छुक नहीं है। इसके कारण ही अब संघ के प्रदेश पदाधिकारियों का दबाव है कि पार्टी की नई टीम में उसके लोगों का दबदबा हो। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संघ ने वी सतीश के जरिए ही अपने लोगों को संगठन में अहम पद देने की राय दी है। दूसरी तरफ वसुंधरा समर्थकों का दबाव है कि संगठन में उन्हें पद मिलें। प्रदेश भाजपा में वसुंधरा समर्थकों में ज्यादातर दूसरे दलों से आए नेता है। परनामी अपनी टीम में ऐसे नेताओं को जगह देना चाहते है जो अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए जमकर काम कर सकें। (Jansatta)

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